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Siddharthnagar News: प्रदूषण व धूल के कणों से आंखों में एलर्जी... सुखेपन से बढ़ गई जलन

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शहर के अशोक मार्ग पर उड़ रही धूल में आवागमन करते लोग।
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सिद्धार्थनगर। शहर के जेल रोड और उसका रोड पर निर्माण कार्य स्थलों से उठ रही धूल और वाहनों से निकले धुएं से प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। इस माहौल में मॉर्निंग वॉक से सेहत बनने की बजाय बिगड़ रही है। शहर में पार्क व मेडिकल कॉलेज के पास सड़क निर्माण कार्य होने के कारण फेफड़ों में संक्रमण भी बढ़ रहा है। उधर से गुजरने वालों को धूल साफ दिखाई दे रही है। लोग मास्क लगाने लगे हैं, इसके बावजूद आंखों में नुकसान हो रहा है।
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निर्माण कार्याें के धूल धुआं से आंखों में जलन और एलर्जी के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। आंखों की रोशनी भी धुंधली हो रही है। ओपीडी में ऐसे मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। डॉक्टरों की राय है कि सुबह की सैर से अभी परहेज करें वरना मुश्किलें बढ़ सकती हैं। आंखों की परेशानी बढ़ने वालों में 15 साल से कम उम्र के किशोर भी शामिल हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि आंखों में सूखापन बढ़ने से जलन होने पर उसे पानी से धोएं। हाथ से न रगड़ें वरना आंख की पुतली पर घाव बन सकता है। मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 30 से 40 मरीज आते थे। अब यह संख्या बढ़कर 60 से 70 के बीच हो गई है। इनमें करीब 20 से 25 मरीज एलर्जी और 10 से 15 मरीजों की आंखों में सूखापन मिल रहा है। इनमें बच्चों की संख्या भी शामिल है। प्रदूषण से बच्चों की आंखों में एलर्जी के लक्षण दिख रहे हैं।
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नेत्र रोग विभाग के डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि ओपीडी में अब 20 फीसदी मरीज आंखों में लालीपन, कीचड़ आने, खुजली होने, पानी गिरने आदि से संबंधित आ रहे हैं। जब मरीजों से पूछा जाता है कि दिक्कत कैसे हो गई तो वे बताते हैं कि सड़क पर उड़ रहे धूल के कण व प्रदूषण से गुजरना होता है। कुछ लोगों का कहना है कि जाम में फंसने से परेशानी बढ़ी है, आंखों में जलन होने लगी है। बताया कि प्रदूषण का सीधा असर आंख पर ही पड़ता है। सड़क पर उड़ती धूल आंख में पड़ जाती है, जिसे निकालने के लिए लोग आंख को मसल देते हैं। इससे आंख की पुतली पर खरोंच आ जाती है।
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