खेसरहा। स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर महिला और बाल रोग विशेषज्ञ की वर्षों से तैनाती न होने के कारण क्षेत्र की लाखों आबादी को समुचित स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं।
खासकर गर्भवतियों, नवजात शिशुओं और बच्चों को इलाज के लिए 40 किलोमीटर दूर मेडिकल कॉलेज बस्ती या गोरखपुर का रुख करना पड़ता है। वहीं, कई बार लोगों को निजी अस्पताल में जाना पड़ता है, जहां उन्हें अधिक रुपये खर्च करने पड़ते हैं। लोग लंबे समय से डॉक्टर की तैनाती की मांग कर रहे हैं। क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल की बदहाल व्यवस्था को सुधारने की दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। खेसरहा ब्लॉक क्षेत्र की आबादी करीब ढाई लाख पहुंच गई है। लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खेसरहा स्थापित है लेकिन संचालित 30 बेड वाले इस अस्पताल में मानक के अनुरूप न तो विशेषज्ञ चिकित्सक हैं और न ही पर्याप्त कर्मचारी।
अस्पताल की स्थापना वर्ष 1966 में हुई थी लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार तब से लेकर आज तक यहां किसी महिला चिकित्सक की स्थायी तैनाती नहीं हो सकी। इसके अलावा फिजिशियन, जनरल सर्जन, हड्डी रोग विशेषज्ञ, स्त्री और प्रसूति रोग विशेषज्ञ और बाल रोग विशेषज्ञ जैसे महत्वपूर्ण पद भी लंबे समय से रिक्त हैं।
इलाज के लिए अस्पताल पहुंची पूजा देवी बताया कि इस सीएचसी के अंतर्गत ढाई लाख आबादी है, जिसमें महिलाओं की संख्या आधे अधिक है। ऐसे में करीबी हाॅस्पिटल में महिला चिकित्सक का न होना बहुत ही दुखदायी है।
महिला चिकित्सक से महिलाएं खुलकर अपनी समस्याएं को साझा करती है तो उपचार भी सही ढंग से हो जाता है। महिला चिकित्सक के अभाव में क्षेत्रीय महिलाओं व नवजात शिशुओं को दूर-दराज जा कर इलाज कराना मजबूरी है।
पुष्पा देवी ने बताया कि कुछ दिन पहले उनके बच्चे की तबीयत अचानक खराब हो गई। सीएचसी पहुंचने पर बाल रोग विशेषज्ञ नहीं मिले, जिसके बाद उन्हें तत्काल जिला अस्पताल ले जाना पड़ा। उन्होंने कहा, बच्चों की बीमारी में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। यदि यहां बाल रोग विशेषज्ञ होते तो समय पर इलाज मिल जाता और इतनी परेशानी नहीं उठानी पड़ती।
इस संबंध में अधीक्षक संतोष कुमार गुप्ता का कहना है कि महिला और बालरोग चिकित्सक होना जरूरी है। इसके लिए पत्राचार किया जा रहा है।