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Siddharthnagar News: मेडिकल कॉलेज में मरीज माफियाओं ने बांट लिए हैं अलग-अलग काम

Fri, 02 Feb 2024 11:47 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में मरीज माफियाओं की आपसी गठजोड़ तगड़ी है। इसलिए इनका धंधा कभी मंदा नहीं होता है और यह सिस्टम में घुसपैठ करके मरीजों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं। मरीज माफिया आपस में काम भी बांट लिए हैं। ऐसा स्वास्थ्यकर्मी बताते हैं। उनका कहना है कि दवा की दलाली करने वाला केवल दवा का काम करता है। ब्लड की जांच कराने वाला वही काम करेगा। जबकि एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड के लिए बरगलाकर निजी केंद्र पर भेजने वाला अपना काम करेगा। वहीं, खून में कमीशन लेने वाला अगल है। इनकी सांठगांठ ऐसी है कि जिसको जो मिला एक-दूसरे के पास भेजे देते हैं। जब कहीं कोई फंसता है तो एक हो जाते हैं। ठगी के शिकार होने वाले को खामोश कर देते हैं, जिससे कार्रवाई आगे नहीं बढ़ती है।
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स्वास्थ्य पेशे को अस्वस्थ बनाने में मरीज माफिया कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। सिस्टम में घुसकर पैठ करके मरीजों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं। चिकित्सक के केबिन से लेकर लैब, एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड और ब्लड बैंक तक इनका गिरोह फैला हुआ है। जो मरीजों को फंसाते हैं और अस्पताल में जांच और दवा खराब होने का हवाला देकर निजी केंद्र पर ले जाते हैं। जहां उनका आर्थिक शोषण करते हैं। इसमें पूरा चैनल काम करता है। स्वास्थ्य कर्मी के करीब कोई दूसरा रहता है। पर्चा लिखाने और जांच कराने के लिए बताए हुए स्थान पर पहुंचाने में कोई दूसरा काम करता है। जब कमीशन की बात आती है तो दवा और जांच लिखने वाले से पर्चा पहुंचाने वाले का हिस्सा बंट जाता है।
मेडिकल कॉलेज से जुड़े लोगों का कहना है कि इनका अलग-अलग ग्रुप है जो काम बांट लिए हैं। कोई एक-दूसरे के काम में दखल नहीं देता है। अगर संबंधित मरीज मिल जाए जो एक-दूसरे को दे देते हैं। कहीं अगर कोई मरीज कुछ बोलता है तो पहले ही समझा-बुझाकर उसे दबा देते हैं। शिकायत न पहुंचे इसलिए कई बार रुपये भी वापस कर देते हैं। इसलिए इनका खेल जारी है और कार्रवाई नहीं हो पाती है।
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मेडिकल स्टोर वालों के सेट हैं मरीज माफिया

इमरजेंसी में मंडराकर मरीजों को फंसाते हुए मेडिकल स्टोर तक पहुंचाने वाले एक संचालक के तीन लोग काम करते हैं। इमरजेंसी में टाइम बदलकर मंडराते हैं। दिन में तो कम रात में कई लोगों को फंसाते हैं। इनकी काली कमाई अंधेरे के बाद शुरू होती है। वहीं, एक दलाल ऐसा है, जिसके साथ तीन लोग हैं। शहर के एक अल्ट्रासाउंड पर जांच करवाने के लिए मरीजों को फंसाता है। चिकित्सकों के पास इसके लोग हैं जो एक-करके मरीज को जांच केंद्र पर पहुंचाते हैं। लेकिन एक को छोड़कर दूसरा काम नहीं पकड़ते हैं।

दलाल की ही कर दी थी पिटाई

अस्पताल में ही दवा की दलाली करने वाला एक दलाल दवा के साथ ही जांच में भी घुस गया। कुछ दिन तक अन्य ग्रुप वालों ने कुछ नहीं बोला। एक दिन रात में उसे पीट दिए। लेकिन उसने कहीं शिकायत भी नहीं की। तीन दिन बाद अस्पताल में दिखा और कुछ लोगों ने चेहरे पर चोट के बारे में पूछा तो बताया कि बाइक से गिर गया था। जबकि पिटाई की चर्चा हर कोई कर रहा था।

आसपास के हैं मरीज माफिया इसलिए नहीं टकराते हैं स्वास्थ्यकर्मी

नाम नहीं छापने की शर्त पर एक डॉक्टर ने कहा कि दलालों की ओर से मरीजोंं का शोषण होते नहीं देखा जाता है। लेकिन बहुत विरोध इसलिए नहीं कर सकते हैं कि ये लोग कुछ भी कर सकते हैं। क्योंकि यह स्थानीय हैं और इनका ग्रुप है। मारपीट और मुकदमे बाजी से बचाया जाता है। इसलिए इनके हौंसले बुलंद हैं।

चर्चा में आया तो रुपये कर दिया वापस

एक यूनिट ब्लड का आठ हजार रुपये वसूल करने वाले मरीज माफिया जब चर्चा में आया तो कार्रवाई से बचने के लिए मरीज को उसके रुपये वापस कर दिए। इसलिए तीमारदार पीछे हट गया और कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी है। वह गरीब और परेशान लोगों को अपना शिकार बनाता है। अकसर सोशल मीडिया पर अपील भी कर देता है कि मरीज को ब्लड की जरूरत है। इसमें कई बार लोग निशुल्क देने के लिए तैयार हो जाते हैं। लेकिन उसके एवज में वह रुपये वसूल लेता है। इस बात की जानकारी रक्तदाता को नहीं रहती है।

दवा और जांच में दलालों का शिकार होने वाले लोग शिकायत करें और आगे बढ़े तो उनके खिलाफ केस दर्ज करवाया जाए। लेकिन मौखिक बताने के बाद जब कार्रवाई के लिए लिखित मांगा जाता है तो पता चलता है कि कार्रवाई नहीं चाहते हैं। दलालों पर शिकंजा कसने के लिए टीम गठित की जा रही है। इसके बाद बाहरी लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
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-डॉ. एके झा, प्राचार्य माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज
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