बुद्ध विद्यापीठ महाविद्यालय में छात्रसंघ अध्यक्ष पद के प्रत्याशी का पर्चा खारिज होने के बाद शनिवार को जमकर हंगामा हुआ। प्रत्याशी समर्थकों ने कॉलेज प्रशासन पर मनमानी और साजिश का आरोप लगाते हुए विरोध जताया। मौके पर पहुंची पुलिस ने समझा-बुझाकर मामले को शांत कराया। बाद में प्रदर्शनकारियों ने डीएम को ज्ञापन देकर उत्पीड़नात्मक कार्रवाई की शिकायत की है। कई छात्र संगठन भी समर्थन में उतर आए हैं। इसे लेकर व्यापक स्तर पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए नामांकन करने वाले शर्फुद्दीन का पर्चा जांच के दौरान शुक्रवार को खारिज कर दिया गया था। कॉलेज प्रशासन ने दलील दी थी कि छात्र ने तीन वर्ष पहले एक आशुलिपिक से मारपीट की थी। इस मामले में उसे एक वर्ष तक परीक्षा से बहिष्कृत भी किया जा चुका है।
लिंगदोह समिति के अनुसार ऐसे छात्र को चुनाव नहीं लड़ने दिया जा सकता। पर्चा खारिज होने की जानकारी के बाद प्रत्याशी शर्फुद्दीन साथी छात्रों के साथ शनिवार को कॉलेज पहुंचे और विरोध जताने लगे। उनका कहना था कि कॉलेज प्रशासन ने मनमाने तरीके से कार्रवाई की है।
पर्चा रद्द करने से पहले पक्ष जानने की भी कोशिश नहीं की। इसे लेकर काफी देर तक बहस और नोकझोंक की स्थिति रही। सूचना पाकर सदर थानाध्यक्ष शिवाकांत मिश्र मौके पर पहुंचे। प्राचार्य डॉ. शशिभूषण तिवारी, चुनाव अधिकारी डॉ. सूर्यनारायण तिवारी के साथ मिलकर वार्ता की।
नियमों का हवाला देते हुए पर्चा वैध ठहराए जाने से असमर्थता जताई। बाद में छात्र कोर्ट में मामला ले जाने की बात कह वहां से निकला। हंगामे के बाद छात्रों के एक दल ने जिलाधिकारी डॉ. सुरेन्द्र कुमार से मिलकर मामले की जानकारी दी। कहा कि जिस विवाद को आधार बनाकर यह कार्रवाई की गई है, उसका काफी पहले ही समाधान हो चुका है। संबंधित कर्मचारी से लिखित माफी मांग चुका है।
छात्र नेता ने मामले की जांच होने तक कॉलेज के चुनाव को स्थगित करने की मांग की। इस आशय की प्रति सिद्धार्थ विवि के कुलपति को भी प्रेषित किया। बुद्ध विद्यापीठ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शशिभूषण तिवारी ने बताया कि कॉलेज प्रशासन ने कोई पक्षपात पूर्ण कार्रवाई नहीं की है। पर्चा खारिज करने के कई आधार हैं। कॉलेज कर्मचारी से मारपीट, एक वर्ष का गैप और शपथ पत्र में तथ्य छिपाने के चलते नामांकन रद्द हुआ है। इसमें कोई साजिश नहीं हुई है।