सरसों की फसल पर माहू कीट का प्रकोप
बोले कृषि वैज्ञानिक, फसल को बचाने के लिए करें दवा का छिड़काव
संवाद न्यूज एजेंसी
मन्नीजोत। अगर सरसों की फसल बोई है तो किसान खेत की नियमित देखरेख करें क्योंकि बारिश के बाद सरसों की फसल में माहू नामक कीट का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। कृषि वैज्ञानिक खेतों में कीट नाशक दवा का छिड़काव करने की सलाह दे रहे हैं। इससे फसल को बचाया जा सकता है। रबी की मुख्य फसलों में सरसों की फसल शामिल है। मगर इस पर कीट ग्रहण बन चुके हैं। कीट की पहचान में यह कीट भूरे एवं काले रंग के होते हैं। यह कीट छोटे आकार की लंबाई 1 से 1.5 मिलीमीटर होती है। जो कोमल पत्तियों और फूलों का रस चूसते हैं। इससे प्रभावित फसल पर फली नहीं बनती और प्रभावित फसल का उत्पादन में गिरावट आ जाती है। इस कीट से तरल और चिपचिपा पदार्थ निकालने के कारण प्रभावित जगह पर काली रंग की फफूंदी आ जाती है। वहां कालापन दिखाई देने लगता है। इस कीट से प्रभावित फसल में पुष्प कमजोर हो जाते हैं। ऐसे में अगर खेत में प्रकार की लक्षण मिले तो तत्काल दवा का छिड़काव करें। इससे फसल को बर्बाद होने से बचा सकते हैं।
बोले कृषि विशेषज्ञ
कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के कृषि वैज्ञानिक फसल सुरक्षा डॉ. प्रदीप कुमार फसल सुरक्षा विभाग ने बताया कि माहूू कीट पर नियंत्रण के लिए दो प्रतिशत नीम का तेल का स्प्रे करना भी फरयदेमंद रहता है। इसके अलावा वर्टिसीलियम लेकानी जैव कारक का छिड़काव भी फायदेमंद रहता है। उन्होंने बताया कि फसल पर छिड़काव हमेशा दोपहर दो बजे के बाद ही करना चाहिए। इसकी रोकथाम के लिए प्रति एकड़ खेत में 5.6 पीली स्टिकी ट्रैप लगाएं। सरसों के माहू के पर्यावरण संतुलित प्रबंधन के लिए 1 मिली लीटर पानी की दर से डाईमिथोएट या आक्सीडेमेटोन मिथाइल या इमिडाक्लोप्रिड का छिड़काव करें। आवश्यकता होने पर आठ से 10 दिनों के अंतराल पर दोबारा छिड़काव करें।