बांसी। छितौना गांव में रेलवे ट्रैक का काम मुआवजा नहीं मिलने की वजह से नहीं बल्कि मुआवजे की दर में गड़बड़ी के आरोपों के कारण रोका गया है। किसानों का दावा है कि उनकी जमीन एनएच-28 से सटी है, लेकिन कागजों में नाला नंबर दिखाकर उसे पीछे की जमीन मान लिया गया, जिससे मुआवजा लाखों में कम हो रहा है।
पूर्वोत्तर रेलवे की खलीलाबाद-बहराइच नई लाइन परियोजना छितौना गांव में मुआवजे की दर को लेकर विवाद में फंस गई है। शुक्रवार को किसानों ने ट्रैक पर मिट्टी पटाई का काम रुकवा दी।
शुरुआती जानकारी में इसे मुआवजा नहीं मिलने का मामला बताया गया, लेकिन मौके की पड़ताल में साफ हुआ कि असली विवाद मुआवजे की दर तय करने को लेकर है। मौजूदा स्थिति यह है कि जिन किसानों का मुआवजा लंबित है, उनके खेत में काम नहीं चल रहा है। जहां कोई आपत्ति नहीं है, वहां काम चल रहा है।
क्षेत्र के 12 से अधिक किसानों की जमीन पूर्वोत्तर रेलवे ने नई रेलवे लाइन बिछाने के लिए अधिग्रहीत कर ली है, लेकिन इन्हें मुआवजा नहीं मिला है। इनका कहना है कि मुआवजा देने के बाद विभाग उनके खेत में काम करे। इसमें श्रीराम, बलिराज यादव, भोला नाथ यादव, नफीस, रामनरेश, अभिमन्यु, धर्मेंद्र, जितेंद्र, सोहराती आदि का कहना है कि उन्हें पीछे के खेत का जो सर्किल रेट है, उस दर से मुआवजा दिया जा रहा है जो गलत है।
विभाग के लोग कह रहे हैं कि एनएच-28 और आप लोगों के खेत के बीच में नाला का नंबर है, इसलिए यह रेट नहीं दिया जा रहा है।
वहीं कुछ लोगों का कहना है कि उन लोगों ने एनएच से सटे हुए सर्किल रेट के दर से बैनामा लिया है, इसलिए उन्हें इसी सर्किल रेट से मुआवजा मिलना चाहिए। हाईवे से सटे सर्किल रेट से मुआवजा पाने के लिए इन लोगों ने जिलाधिकारी न्यायालय में वाद दाखिल है। वहीं, इसी गांव के रामरूप यादव, अंगद, रामनयन, मिथिलेश, राम करन, राम शब्द आदि का कहना है कि उनके खेत का मुआवजा बन चुका है, लेकिन उन्हें नहीं दिया जा रहा है। वह काफी दिनों से एसएलओ ऑफिस का चक्कर लगा रहे हैं और उन्हें मुआवजा नहीं मिल रहा है।