संवाद न्यूज एजेंसी
खेसरहा। क्षेत्र में स्थित बांसी पनघटिया बांध पर बंजरहा एवं डुमरिया बुजुर्ग गांव के पास बांध किनारे स्थित कटान स्थल अति संवेदनशील है। इन दोनों जगहों पर पूर्व में तेज कटान होने से नदी बंधे तक पहुंच गई है। इस जगह पर बाढ़ बचाव के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई तो बरसात में बंधा टूटने से सैकड़ों गांव डूब जाएंगे।
डुमरिया बुजुर्ग गांव के पास राप्ती नदी में कटान रोकने के लिए बनाई गई ठोकर का अगला हिस्सा पिछले वर्ष नदी में बह गया, वह अभी भी डैमेज है। पूर्व में नदी की कटान से डुमरिया गांव को लोगों की पांच सौ बीघा जमीन नदी में विलीन हो गई है।
हालांकि सिंचाई विभाग ने बाढ़ की रोकथाम के लिए कुछ काम कराया है, लेकिन वह नाकाफी है। बांसी पनघटिया बांध पर 18 किमी दूर डुमरिया बुजुर्ग बाढ़ बचाव के लिए अति संवेदनशील जगह है। डुमरिया बुजुर्ग गांव निवासी वशिष्ठ नारायण पांडेय ने बताया कि यहां विभाग की तरफ से बाढ़ बचाव का काम कराया गया था, इसके बावजूद चार साल में गांव के लोगों का करीब पांच सौ बीघा जमीन नदी के कटान में चला गया।
यहां राप्ती नदी बंधे के करीब पहुंच गई है। अगर कटान रोकने के लिए ठोस कोई कदम नहीं उठाया गया तो क्षेत्र के सैकड़ों गांवों के लोगों को भयंकर बाढ़ की स्थिति झेलनी पड़ेगी। बाढ़ बचाव के लिए चार साल पहले बनाया गया ठोकर नदी के किनारे का हिस्सा पिछले वर्ष टूटकर बह गया। तब से उसी हालत में पड़ा हुआ है।
यही स्थिति 16 वें किलोमीटर पर बंजरहा बांध की है। नदी का बहाव दक्षिण से सीधा उत्तर तरफ बांध के नजदीक हो गया है।
बंजरहा निवासी विद्याधर पांडेय ने बताया कि बाढ़ बचाव के लिए सिंचाई विभाग से डैपनर बनाने का काम चल रहा है। कटान के मुख्य मुहाने पर अभी तक काम शुरू नहीं हुआ है। ठेकेदार के मनमानी से आधा अधूरा काम हो रहा। विभाग भी अपनी सक्रियता नहीं दिखा रहा है।
अगर बाढ़ बचाव के लिए समुचित व्यवस्था नहीं किया गया तो आने वाले बरसात में बंधा टूटने पर सैकड़ों गांवों में तबाही मच जाएगी। नदी के इस हालात पर क्षेत्रीय लोगों में बाढ़ आने का भय बना हुआ है।