भनवापुर। बस्ती-ढेबरुआ मुख्य मार्ग स्थित बाब-ए-अबू तालिब पर यौमे आशूरा के मौके पर आयोजित शोक कार्यक्रम में धर्मगुरुओं ने इमाम हुसैन की शहादत और उनके संदेशों पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि मुहर्रम इंसानियत, मोहब्बत, न्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष का पैगाम देता है।
कर्बला की शहादत का वर्णन होते ही अजादार गम में डूब गए और पूरा वातावरण भावुक हो उठा। सुबह नमाज के बाद वक्फ शाह आलमगीर सानी इमाम बारगाह में मजलिस आयोजित हुई। इसके बाद अंजुमन फरोग मातम और अंजुमन गुलदस्ता मातम ने नौहाख्वानी और मातम करते हुए गांव का भ्रमण किया और ईदगाह में पारंपरिक आशूरा की रस्म अदा की। इसके बाद आयोजित शोकसभा में उत्तराखंड से आए मौलाना आजम खान सहित अन्य धर्मगुरुओं ने संबोधित किया।
इस दौरान नफीस सैयद, सावन हल्लौरी, हसन जमाल, कामयाब बबलू, रजा, मुमताज, हानी, मोहम्मद हैदर, खुलूस खुशनीद और कमर समेत अन्य लोगों ने नौहा पेश कर कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।