-2022 में जिले समेत 12 मेडिकल कॉलेज को एमआरआई मशीन देने की हुई थी पहल
-सूची में शामिल होने के बाद भी शासन से आगे नहीं बढ़ी कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के चार वर्ष पूरा होने के बाद भी एमआरआई की सुविधा मुहैया नहीं हो पाई है। इससे मरीजों को एमआरआई करवाने के लिए गोरखपुर का चक्कर लगाना पड़ता है। ऐसे में मरीजों को असुविधा होती है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 2022 में शासन से निर्देश जारी हुआ था, लेकिन उसके बाद कोई पहल नहीं हुई है।
मेडिकल कॉलेज के सभी विभागों में प्रतिदिन लगभग 1300 से 1500 मरीजों का ओपीडी से इलाज किया जाता है, जबकि इमरजेंसी में भी प्रतिदिन 35 से 40 मरीज आते हैं। ऐसे में इन मरीजों में से प्रतिदिन 20 से 25 मरीजों को डॉक्टर एमआरआई की सलाह देते हैं, लेकिन मेडिकल कॉलेज में इसकी सुविधा न होने से मरीजों को गोरखपुर का चक्कर लगाना पड़ता है। कई बार रिपोर्ट समय से नहीं मिलने पर मरीज को रेफर करने की भी नौबत आती है। ऐसे में मरीजों को असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। शासन से पहल नहीं होने से मरीज को लाभ नहीं मिल रहा है।
शनिवार को मेडिकल कॉलेज के आर्थाे विभाग में इलाज करवाने आए अनवर ने बताया कि रीढ़ की हड्डी में दर्द है, दवा से सही नहीं हो रहा है। डाॅक्टर को दिखाया तो एमआरआई करवाने की सलाह दी। मेडिकल कॉलेज में एमआरआई की सुविधा नहीं होने से गोरखपुर जाना पड़ेगा। जिले में एमआरआई की सुविधा हो तो मरीजों को गाेरखपुर का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।
वर्जन
एमआरआई मशीन को लगवाने के लिए शासन को पत्र लिखा जाएगा। मेडिकल कॉलेज में एमआरआई की सुविधा होने से मरीजों को सहूलियत मिलेगी।
-प्रो. राजेश मोहन, प्राचार्य