दुर्गेश के खंडहर के पास कुछ बच्चे खेल रहे थे, उसी समय दुर्गेश की पड़ोसी अजोरा अपनी जमीन में गई थी। अजोरा को सुंदर सा घड़ा दिखा तो वह करीब गई और उसे उठा ले गई। इस बात की खबर दुर्गेश को लगी तो उसने अजोरा से घड़ा ले लिया। उसके बाद अजोरा ने पुलिस से शिकायत की कि चांदी, तांबे के सिक्के मिले हैं, ये सिक्के दुर्गेश के पास हैं। बिना देर किए ही पुलिस पहुंची तो दुर्गेश के पास सभी सिक्के मिल गए।
पुरातात्विक धरोहर हैं सिक्के
सिद्धार्थनगर विश्वविद्वालय संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग व प्राचीन इतिहास एसो प्रोफेसर डॉ. नीता यादव ने कहा कि ये सिक्के पुरातात्विक धरोहर हैं। जांच के बाद इसे संग्रहालय में रखा जाएगा और अध्ययन में काम आएंगे। सिद्धार्थनगर के पुरातात्विक इतिहास में इन सिक्कों की भूमिका बड़ी हो सकती है। जांच के बाद पता और भी महत्वपर्ण साक्ष्य सामने आ सकत हैं।
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और भी सिक्के मिल सकते हैं
सिद्धार्थनगर विश्वविद्वालय के संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग व प्राचीन इतिहास के असिस्टेंट प्रोफसर डॉ. शरदेंदु त्रिपाठी ने कहा कि बौद्ध क्षेत्र ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। अंग्रेज सरकार ने भी इस क्षेत्र को महत्वपूर्ण माना था। ये सिक्के शोध की दृष्ट से महत्वपूर्ण हो सकते हैं। प्राचीन काल में बैंक नहीं थे इसलिए लोग घड़े में ही धन संचय करते थे। इस स्थान पर और भी सिक्के मिल सकते हैं।
बौद्ध क्षेत्र में प्राचीन टीलों की शिकायत के बाद केंद्रीय पुरातत्व विभाग ने जिले के सभी गांवों में पुरातात्विक सर्वे का आदेश दिया है। सर्वे का कार्य जारी है, हालांकि जांच पुरी होने के बाद ही रिपोर्ट सामने आएगी। कुछ दिन पहले भी प्राचीन टीले की अवैध खुदाई की जा रही थी। अमर उजाला ने खबर प्रकाशित की तो टीले के संरक्षण की कवायद शुरू हुई।
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पुलिस अधीक्षक अमित कुमार आनंद ने कहा कि पुलिस की सक्रियता से भी सिक्के बरामद कर लिए गए हैं। इस मौके पर राजस्व विभाग की टीम भी थी। सिक्कों की प्राचीनता की जांच के लिए पुरातत्व विभाग को पत्र लिखा गया है। प्राचीनता के साक्ष्य मिलने की संभावना है।