सिद्धार्थनगर। ढेबरुआ थाना क्षेत्र के बढ़नी आंबेडकर नगर वार्ड नंबर 10 में वर्ष 2015 में बावरिया गिरोह द्वारा की गई डकैती और दोहरे हत्याकांड में फैसला आने के बाद परिवार के जख्म फिर ताजा हो गए। प्रभावित परिवार सुनकर सिहर उठा और बोला भरपाई तो नहीं होगी लेकिन सजा की जानकारी मिली तो सुकून जरूर मिला है। मोबाइल की लोकेशन के जरिये हत्यारों तक पुलिस पहुंची।
प्राथमिकी दर्ज होने के तीन माह 20 दिन में विवेचना पूरी करके जार्चशीट न्यायालय में दाखिल हुई और न्यायालय ने मामले को संज्ञान में लिया। इसके बाद सुनवाई शुरू हुई। केस में 59 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। मॉनिटरिंग सेल ने मामले में निगरानी शुरू की। समय-समय पर गवाही हुई और इस अपराध में इन डकैतों को दूसरी बार सजा हुई। इससे पहले इन बदमाशों को सिद्धार्थनगर थाना क्षेत्र में इसी प्रकार के अपराध में सजा हुई थी।
वहीं, इस कांड को करीब से देखने वालों के सामने वह दृष्य एक बार फिर घूम गया, जिन्हें सजा होने की जानकारी मिली। लूट और हत्याकांड के बाद कानून व्यवस्था पर सवाल जरूर उठे। पुलिस ने उस रेडियस में सक्रिय मोबाइल पर काम शुरू किया और कड़ी से कड़ी को जोड़कर बदमाशों के गिरहबान तक पहुंच गई। धरपकड़ शुरू हुई तो इस गैंग के तार और अपराध करने वाले पुलिस की रडार पर आने लगे। फिर इसी के जरिये गैंग सामने आया और घटनाएं खुली तो पता चला कि अपराध करने वालों क संख्या 16 हो गई। टाॅप निगरानी में रखा गया केस, शुरू हुआ सजा का सफर : डकैती और दोहरे हत्याकांड का मामला न्यायालय में चल रहा था। इसी में वर्ष जुलाई 2023 में प्रदेश सरकार की ओर से ऑपरेशन कनविक्शन शुरू हुआ। इसमें संगीन अपराध को प्राथमिकता देते हुए काम शुरू करना था। इसके बाद पुलिस ने टॉप संगीन अपराध में ढेबरुआ थाने में दर्ज इस मामले पर काम करना शुरू किया गया। गवाहों की स्थिति, गवाही और न्यायालय में कितने साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। उसकी दोबारा गहन समीक्षा शुरू हुई। राजकरन और पप्पू को न्यायालय द्वारा 20 दिसंबर 2023 को 10 वर्ष के कठोर कारावास तथा प्रत्येक को 60,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। दौरान मुकदमा एक अभियुक्त बुधराम की मृत्यु हो गई।
वहीं, साक्ष्य अभाव में शोएब, साहिल, मीरहसन, नवीजान, मो. आजम, शाबिल हसन, समीर, मेंहदी हसन, अफजल एवं सल्लन को आरोप से बरी किया गया। इसी कड़ी में हुई जांच इसी प्रकरण में विवेचना के दौरान ही अभियुक्त सल्लू उर्फ सलीम, आमिर उर्फ सद्दाम, साबिर उर्फ अकरम के मोबाइल की लोकेशन मौका-ए-वारदात वाले स्थान पर मिली, जिसके आधार पर इनका नाम सामने आया और घटना में पीड़ित की ओर से अभियुक्तों की पहचान न्यायालय में ट्रायल के दौरान की गई।
इनके आरोप की प्रमाणिकता के आधार पर और न्यायालय में परीक्षण के बाद 31 मार्च को दोषी पाते हुए तीनों अभियुक्तों को दंडित किया गया। न्यायालय ने तीनों अभियुक्तों को थाना सिद्धार्थनगर क्षेत्र 22 फरवरी 2016 की रात हुई वारदात से मुकदमें की सुनवाई में 22 अप्रैल 2025 को दोषी करार देते हुए 10-10 वर्ष की सजा से दंडित किया जा चुका है। संवाद