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पूरी रात जमी महफिल, कविताओं पर झूमे श्रोता

Tue, 26 Apr 2016 11:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
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कवि सम्मेलन व मुशायरे में उपस्थित श्रोता। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नगर में सोमवार रात रचनाकारों की महफिल सजी। कवि सम्मेलन व मुशायरे में शामिल नामचीन कवियों व शायरों ने रचनाओं से श्रोताओं का दिल जीत लिया। हास्य-व्यंग्य के माध्यम से व्यवस्था की ख्रामियों पर चोट किया तो गजल, गीत सुनाकर सराहना पाई। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. कलीम कैशर व नजामत शायर नदीम फारुख ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम का आगाज नात शरीफ से शायर नासिर जौनपुरी ने किया। शायर जमाल कुद्दुशी ने क्यों इतने फितने उठा रहे हो, जले हुए को जला रहे हो, गला हमारा ही कट रहा है हमी को कातिल बता रहे हो... सुनाकर वाहवाही बटोरी।
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दिलशाद  गोरखपुरी ने नफरत को हमें मिटाना है, बस प्यार का दीप जलाना है, हिंदू-मुस्लिम सब एक हो जाए ऐसा भारत हमें बनाना है... सुनाई। सुशील सागर की पंक्तियां जिन्होंने राह दिखाई पूरी दुनिया को वह गीता कुरान हम दिल में रखते है... ने राष्ट्रवाद की भावना जगाई।
अंबर बस्तवी ने अपने ईमान को गर हमने संवारा होता ये जमाना कभी दुश्मन न हमारा होता... पेश किया। हास्य कवि विकास गोखल ने काला धन तो आय जात एक झपट्टा मा, रामदेव जो भगते न सलवार दुपट्टा मा... से श्रोताओं को गुदगुदाया। शायरा तरन्नुम नाज ने  काम ऐसा जमाने में कर जाऊं मैं, नाम जिंदा रहे और मर जाऊ मैं से वाहवाही बटोरी। निजाम बनारसी ने लोग अपने बच्चों से जिद न करें, अब खिलौनों के अंदर बम बोलते हैं... से आतंकवाद पर प्रहार किया।
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कार्यक्रम में डॉ. ज्ञानेंद्र द्विवेदी, दीपक, शायरा खुशबू रामपुरी, कादिर राना, शाहाब बलरामपुरी, शिवसरन फतेहपुरी, उस्मान उतरौलवी, फरमूद इलाहाबादी, अल्ताफ जिया ने भी रचनाएं पेश की। कार्यक्रम में नगर के अलावा बलरामपुर, नेपाल के कृष्णानगर सहित अन्य क्षेत्रों से श्रोता पहुंचे।
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