बासमती को मात दे सकता है कालानमक : डॉ. आरसी
- आंबेडकर सभागार में कालानमक प्रमोशन बोर्ड बनाने के लिए हुई बैठक
- कृषि उत्पादन आयुक्त से मुलाकात करेगा प्रतिनिधि मंडल
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। कालानमक चावल के सुगंध और पोषक तत्वों की बदौलत बासमती चावल को मात देना कोई बड़ी चुनौती नहीं है। इसके लिए बासमती प्रमोशन बोर्ड की तर्ज पर कालानमक चावल प्रमोशन बोर्ड बनाने की आवश्यकता है। गुणवत्ता और सुगंध दोनों लिहाज से कालानमक चावल बासमती से बेहतर है, इस कारण प्रमोशन बोर्ड के क्रियाशील होने के बाद कालानमक का निर्यात बढ़ेगा, इससे जिले के किसान समृद्ध और खुशहाल होंगे।
ये बातें कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरसी चौधरी ने कही। वह बुधवार को आंबेडकर सभागार में कालानमक चावल प्रमोशन बोर्ड बनाने के लिए आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। डॉ. आरसी चौधरी ने बताया कि प्रमोशन बोर्ड के गठन के बाद कालानमक चावल का मानक तय हो जाएगा। इसमें मिलावटखोरी करने वाले भी पकड़े जाएंगे। जब अच्छे चावल की बिक्री होगी तो देश-विदेश में मांग बढ़ेगी। यह बोर्ड कालानमक के निर्यात के लिए विभिन्न देशों में बाजार की तलाश करेगा। इसके अंतर्गत अनुसंधान एवं प्रचार प्रसार भी होगा। सिद्धार्थनगर या गोरखपुर में प्रमोशन बोर्ड बनने के बाद गोरखपुर बस्ती मंडल के 11 जिले के किसानों का फायदा होगा।
नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक बृजराज साहनी ने कहा कि बोर्ड के गठन से कृषक उत्पादक संगठनों से जुड़े किसानों की उन्नति होगी।
बैठक में उपनिदेशक कृषि अरुण विश्वकर्मा ने बताया कि एक जिला एक उत्पाद प्रोत्साहन योजना में शामिल होने के बाद कालानमक चावल का निर्यात बढ़ा है। एक वर्ष में सिंगापुर, नेपाल सहित चार देशों में 50 टन से अधिक कालानमक चावल का निर्यात हुआ है। जिला कृषि अधिकारी सीपी सिंह ने बताया कि जिले में सात हजार से अधिक किसान 12 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में कालानमक धान की खेती कर रहे हैं। इस वर्ष कालानमक चावल का रकबा 15 हजार हेक्टेयर से अधिक होने की संभावना है।
कृषि उत्पादन आयुक्त से मुलाकात करेगा प्रतिनिधि मंडल
बैठक में तय हुआ कि गोरखपुर में 28 जून को कृषि उत्पादन आयुक्त के आगमन के मौके पर बोर्ड की गठन के लिए जिले का प्रतिनिधि मंडल उनसे मुलाकात करेगा। कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरसी चौधरी, कृषक उत्पादक संगठन के अभिषेक सिंह एवं श्रीधर पांडेय बोर्ड की गठन का प्रस्ताव प्रस्तुत करेंगे। बैठक में प्रभारी मुख्य विकास अधिकारी शेषमणि सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एमपी सिंह, कालानमक चावल पर शोध करने वाली अंजलि साहनी मौजूद थीं। 24 कृषक उत्पादक संगठन के करीब 100 किसान शामिल हुए।