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जिन्होंने परीक्षा नहीं दी, उन्हें भी दे दिया फर्जी अंकपत्र

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संतकबीरनगर के शिक्षक माफिया का जिले में कई लोगों से है संबंध
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इलाहाबाद से लेकर आंबेडकरनगर तक फैला है शिक्षक माफिया का जाल
15 अक्तूबर 2017 को हुई टीईटी परीक्षा के फर्जी अंकपत्र किए गए जारी
नीरज मिश्र
सिद्धार्थनगर। संतकबीरनगर के शिक्षक माफिया ने मोटी रकम लेकर सैकड़ों लोगों को टीईटी का फर्जी अंकपत्र दिया था। ये अंकपत्र उन लोगों को दिए गए जो 15 अक्तूबर 2017 को आयोजित टीईटी परीक्षा में शामिल भी नहीं हुए। कई ने तो रजिस्ट्रेशन तक नहीं कराया था। खास बात यह है कि इसके बाद प्रदेश में 69 हजार शिक्षकों की नियुक्ति हुई। इनमें कई लोगों को संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, कुशीनगर, देवरिया, अंबेडकर नगर, इलाहाबाद आदि शहरों में नियुक्ति मिली। सूत्रों की मानें तो जिन नौ फर्जी शिक्षकों की सूची गोरखपुर पुलिस को मिली है। उनमें से एक शिक्षक संतकबीरनगर का भी है। वर्तमान समय में वह स्कूल छोड़कर फरार है। उसके भी टीईटी के अंकपत्र उसी ने बनवाए थे।
इस मामले में अब तक जहां 83 शिक्षक बर्खास्त हो चुके हैं वहीं बीएसए के स्टेनो हरेंद्र सिंह, लिपिक धर्मेंद्र, शिक्षक माफिया राकेश सिंह सहित शिक्षक सच्चिदानंद पांडेय जैसे लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। गोरखपुर के सीओ कैंट रोहन प्रमोद बोत्रे के हाथ नौ ऐसे शिक्षकों की लिस्ट लगी है, जिनके टीईटी के अंकपत्र फर्जी हैं। सूत्र बताते हैं कि इनमें से एक शिक्षक संतकबीरनगर का रहने वाला है। इसके अलावा उसने 15 अक्तूबर 2017 को आयोजित टीईटी परीक्षा का अंकपत्र सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, आंबेडकरनगर, देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर, बस्ती, बलरामपुर, मथुरा सहित पश्चिमी यूपी के कई जिलों के लोगों को दिया है। उसकी ओर से जारी किए गए अंकपत्र में परीक्षा नियामक प्राधिकारी, उत्तर प्रदेश, 23 एलनगंज इलाहाबाद हूबहू लिखा है। अंकपत्र में सचिव के हस्ताक्षर भी हैं। गोरखपुर के सीओ कैंट रोहन प्रमोद बोत्रे का कहना है कि मामले की जांच हर बिंदु पर की जा रही है। कुछ लिपिकों सहित शिक्षक माफिया के नाम भी सामने आए हैं। इसका खुलासा जल्द कर दिया जाएगा।
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इनसेट
क्यूआर कोड नहीं हो रहा स्कैन
सूत्रों की मानें तो टीईटी परीक्षा में जिसने रजिस्ट्रेशन तक नहीं कराया, उसे भी टीईटी के अंकपत्र जारी किए गए हैं। जिले में ऐसे लोगों की संख्या एक दर्जन से अधिक है। सूत्रों की मानें तो संतकबीरनगर में दो दर्जन से अधिक ऐसे शिक्षक हैं, जो 2017 की टीईटी के फर्जी अंकपत्र के आधार पर नौकरी कर रहे हैं। फर्जी टीईटी अंकपत्र में क्यूआर कोड स्कैन भी नहीं हो पा रहा है।
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