झोपड़ी फूंकने के मामले में दो को आजीवन कारावास
सिद्धार्थनगर। त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र के सिकटा गांव में 23 वर्ष पूर्व अनुसूचित जाति के लोगों की झोपड़ी फूंकने और मारपीट करने के मामले में दो आरोपितों को आजीवन कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। अपर जिला एवं सत्र/विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट डॉ. राकेश कुमार ने सुनवाई कर सजा सुनाई। उन्होंने मामले में 28 आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया है। आठ आरोपितों की मृत्यु हो चुकी है और तीन नाबालिग पाए गए।
त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र के सिकटा गांव निवासी रामकुमार ने पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि दो जून 1998 को गांव के ही कपिलदेव उर्फ वीपी सिंह और राजू समेत 41 लोगों ने दलित वर्ग के लोगों को मारापीटा और उनकी झोपड़ी फूंक दी। चिताही चौराहे पर कहासुनी और मारपीट के बाद शाम को गोलबंद और हथियार से लैस होकर आरोपितों ने धावा बोल दिया। जिससे इस घटना में कई लोग चोटिल हुए थे और 35 आवासीय झोपड़ियां फूंकी गयी थी।
मामले में पुलिस ने 41 लोगों पर बलवा, मारपीट, एससीएसटी एक्ट में केस दर्जकर छानबीन की और न्यायालय चार्जशीट दाखिल कर दी। अपर जिला एवं सत्र/विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट कोर्ट में सुनवाई हुई। इस बीच आठ आरोपितों की मौत हो चुकी थी और तीन नाबालिग पाए गए। कोर्ट ने 30 आरोपियों में कपिलदेव उर्फ वीपी सिंह और राजू को आजीवन कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई और शेष 28 को आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।