ब्लॉक स्तर पर नहीं खुले पुस्तकालय
पुस्तकालय में आईएएस, आईपीएस की तैयारी से जुड़ीं पुस्तकों के साथ ही धर्मग्रंथ भी रखने की थी योजना
तीन वर्ष पूर्व सभी ब्लॉकों में स्थापित होने थे राजकीय पुस्तकालय
अब तक केवल जिला मुख्यालय पर ही स्थापित हो पाया
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। गांव की प्रतिभाओं को मुकाम दिलाने के लिए सरकार की ओर से ब्लॉक स्तर पर खोले जाने वाले राजकीय पुस्तकालय की योजना तीन वर्ष बाद भी जमीन पर नहीं उतर सकी है। केवल जिला पुस्तकालय तक ही यह व्यवस्था सिमट गई। अगर ब्लॉक स्तर पर पुस्तकालय खुल जाते तो प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयारी के लिए युवाओं को बाहर को रास्ता नहीं देखना पड़ता।
गांव में रहने वाले युवा भी प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल हों और अच्छा मुकाम हासिल करें। उन्हें पुस्तकों के कारण पढ़ाई से मुंह न मोड़ना पड़े। लिहाजा, जिला मुख्यालय पर राजकीय पुस्तकालय स्थापित किया गया है। वर्ष 2017 में इसी तर्ज पर ब्लॉक स्तर पर पुस्तकालय खोले जाने की कवायद शुरू हुई। इसमें उसका ब्लॉक में एक कार्यालय खुला भी और पुस्तकें भी आईं। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी से जुड़े कुछ छात्रों ने पंजीकरण भी कराया था। मगर समय के साथ यह समायोजित करके राजकीय जिला पुस्तकालय में समाहित कर दिया कर दिया। अन्य ब्लॉकों में तीन वर्ष बाद भी योजना लागू नहीं हो पाई। अगर ब्लॉक स्तर पर यह योजना शुरू होती तो ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए लखनऊ, गोरखपुर, प्रयागराज और दिल्ली जैसे महानगरों में जाकर मंहगे दाम पर किताब नहीं खरीदनी पड़ती और न ही उन्हें पढ़ाई के लिए घर से दूर रहना पड़ता। क्योंकि यहां एक बार पंजीकरण कराने के बाद पूरे जीवन व्यक्ति सदस्य बन जाता और किताबों को लेकर जाकर पढ़ सकता था। अगर ब्लॉक स्तर पर पुस्तकालय खुल जाता तो बहुत सहूलियत मिलती। डीआईओएस अवधेश नरायन मौर्य ने बताया कि राजकीय पुस्तकालय चल रहा है। लोग यहां सदस्य बने हैं और पढ़ाई के लिए आते हैं। ब्लॉक स्तर पर पुस्तकालय खोले जाने की योजना के समय वह जनपद में नहीं थे। इस बारे में उन्हें जानकारी नहीं है।
375 लोगों का है पंजीकरण
जिला पुस्तकालय में अब तक 375 लोगों ने पंजीकरण कराया है। इनमें लेखपाल, पुलिसकर्मी, बेसिक और माध्यमिक विभाग के शिक्षक, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी से जुड़े छात्र भी शामिल हैं। इनमें कुछ लोग नियमित पुस्तकालय में पढ़ाई करने के लिए आते हैं। जबकि कुछ लोग पुस्तक लेकर घर जाकर तैयारी करते हैं। पुस्तकालय में पुस्तक पढ़ने के लिए व्यक्ति को केवल एक बार सदस्य बनना होता है। इसके लिए उसे 300 रुपये देने होते हैं। इसके बाद व्यक्ति पूरे जीवन के लिए सदस्य बन जाता है और वह पुस्तक लेकर जाकर पढ़ सकता है।
यह है पढ़ाई में सहूलियत
एक बार सदस्य बनने वाला व्यक्ति एक माह के लिए किताब ले जा सकता है। इसके बाद अगर एक दिन अधिक होता है तो कर के रूप में एक रुपये प्रतिदिन की दर से भुगतान करना होगा। अगर एक पुस्तक ले जाते हैं तो उन्हें 4500 रुपये कीमत तक की पुस्तक पढ़ने के लिए दी जाएगी। अगर दो या तीन किताब ले जाते हैं तो 500 रुपये के नीचे की सभी पुस्तकें देने की सुविधा है। राजकीय पुस्तकालय में आईएएस, आईपीएस, पीसीएस, बैंकिंग, एसएससी, टीईटी, धर्मग्रंथ सहित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकें उपलब्ध हैं। साथ ही समय-समय पर पुस्तकें आती रहती हैं। ताकि समय के साथ नई जानकारी मिल सके।