संवाद न्यूज एजेंसी
भनवापुर। क्षेत्र के चौखड़ा में चल रही रामलीला में शुक्रवार की रात्रि भगवान राम के वनगमन से लेकर भरत द्वारा चरण पादुका लेकर लौटने तक की लीला का मंचन किया गया, जिसे देखने के लिए दूरदराज से श्रद्धालुओं का आए।
मंचन में दिखाया गया कि तमसा नदी पार कर गंगा पार होने के लिए भगवान राम ने केवट को बुलाया। केवट ने पहले हठ किया कि वह भगवान के चरण धोकर चरणामृत लेगा, तभी उन्हें नाव पर बैठाकर पार करेगा। इस संवाद के बाद, केवट ने श्रद्धापूर्वक राम के चरण धोए, चरणामृत लिया और फिर राम, लक्ष्मण और सीता को गंगा के पार कराया।
इधर अयोध्या में राम के वियोग में महाराजा दशरथ का दुखद निधन हो गया। गुरु वशिष्ठ ने तत्काल भरत और शत्रुघ्न को उनके ननिहाल से बुलवाया। भरत द्वारा दशरथ का अंतिम संस्कार किया गया। वहीं गुरु वशिष्ठ ने भरत से राजगद्दी संभालने को कहा, लेकिन भरत ने दृढ़ता से कहा, राज सिंहासन राम का है, भरत की बातें सुनकर सभी रानियां और अयोध्यावासी उनके साथ चित्रकूट की ओर चल दिए। वे वाल्मीकि आश्रम पहुंचे, जहां महर्षि वाल्मीकि ने उन्हें बताया कि राम, लक्ष्मण और सीता चित्रकूट में निवास कर रहे हैं।
भरत विलाप करते हुए चित्रकूट में जाकर राम के चरणों पर गिर पड़े और उन्हें अयोध्या वापस चलने के लिए विनती की।
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