जिले के सभी 14 मतगणना केंद्रों पर सुबह सात बजे से वोटों की गिनती शुरू हुई। नौ बजे के बाद परिणाम आने लगे। विजेता प्रत्याशियों और उनके समर्थकों में खुशी और उल्लास छा गया। एक-दूसरे को गुलाल लगाकर जीत का जुलूस निकाला।
इस दौरान मतगणना केंद्र के बाहर व आस पास का इलाका समर्थकों से भरा पड़ा रहा। दिन निकलने से पहले ही लोगों का रेला मतगणना केंद्रों पर उमड़ पड़ा। प्रत्याशियों व समर्थकों की भारी भीड़ के चलते आस पास की सड़कों पर चक्काजाम की स्थिति पैदा हो गई।
लोकतंत्र के इस मेले का नजारा देखने लायक था। गांव की सरकार के नए मुखिया का नाम जानने को सब बेताब दिखे। केंद्र के भीतर चल रही हलचल जानने को उतावले समर्थक प्रत्याशी की जीत की आस लगाए पूरे दिन जमे रहे। न किसी को खाने की चिंता थी और न ही किसी को अपने काम की। लोकतंत्र के इस पर्व का परिणाम जानने के लिए वे अपना एक दिन खर्च करने में हर्ज नहीं समझ रहे थे। भीतर से
बढ़त या जीत की खबर सुनकर समर्थकों का जोश बढ़ जाता और वे अपने प्रत्याशी के स्वागत में फूलमाला व गुलाल लाना नहीं भूले। विजय जुलूस पर पाबंदी की वजह से वे दिल खोलकर सड़कों पर तो नहीं झूम पाए लेकिन चेहरे की खुशी किसी से छिपाए नहीं छिप रही थी। चुनाव प्रचार में कड़ी मेहनत के बाद जीत हासिल करने वाले प्रत्याशियों की तो सारी थकान मिट गई।
लेकिन जो हारे उन्हें अपने समर्थकों के साथ मायूस होकर लौटना पड़ा। हारने वालों में कुछ लोग प्रचार के दौरान हुई चूक का रोना रो रहे थे तो वहीं कुछ लोग खास वोटरों के सिर पर धोखा देने का आरोप लगाते नजर आए। हारने वालों में कुछ चेहरे ऐसे भी नजर आए जो अपने लोगों से मिलकर मायूस न होने का दंभ भर कर और अगले चुनाव में सब ठीक हो जाने का भरोसा दिला रहे थे।