जोगिया क्षेत्र के मनोहरी गांव में मृतक गणेश के घर पर घटना की जानकारी लेती पुलिस। संवाद
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
झोलाछाप के इलाज से युवक की मौत, केस दर्ज
- चिल्हिया थाना क्षेत्र के करौंदा नानकार चौराहे है झोलाछाप का क्लिनिक
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर/ धेंसा। चिल्हिया थाना क्षेत्र के करौंदा नानकार चौराहे पर रविवार पेट में दर्द का इलाज कराने पहुंचे युवक को झोलाछाप ने इजेंक्शन दिया। इससे उसकी तबीयत और बिगड़ गई। परिजन उसे जिला अस्पताल ले जा रहे थे कि रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और तहरीर के आधार पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज करके मामले की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार जोगिया कोतवाली क्षेत्र के मनोहरी गांव निवासी गणेश (23) पुत्र विश्वनाथ छत्तीसगढ़ में रहकर फर्नीचर का कार्य करता था। वह कुछ दिनों से घर पर ही रह रहा था। परिवार के लोगों के मुताबिक गणेश की तबीयत रविवार सुबह खराब हो गई। पेट में दर्द हो रहा था। इसके बाद चिल्हिया थाना क्षेत्र के करौंदा नानकार चौराहे पर स्थित क्लिनिक चलाने वाले झोलाछाप के पास ले गए। उसने दर्द को कम करने के लिए एक इंजेक्शन लगाया तो स्थिति और बिगड़ गई। हालत गंभीर होता देख जिला अस्पताल ला रहे थे कि रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद शव को लेकर घर पहुंच गए और झोलाछाप पर इलाज में लापरवाही व गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाते हुए विरोध शुरू कर दिया। मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंच गई। चिल्हिया पुलिस ने शव का पंचनामा करके पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इस संबंध में एसओ राजेश कुमार मौर्य ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। युवक के परिवार की ओर से मिले तहरीर के आधार पर झोलाछाप के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज करके मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
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थानों की विवाद में लटका रहा मामला
युवक की मौत के बाद शव का पोस्टमार्टम कौन कराए और कार्रवाई के लिए कौन आगे आए? इसके लिए चिल्हिया और जोगिया पुलिस उलझ गई। युवक जोगिया कोतवाली क्षेत्र का रहने वाला था। जहां इलाज हुआ वह चिल्हिया थाना में पड़ता है। लाश लेकर लोग घर चले गए, इसलिए घंटों तक एक-दूसरे का कार्यक्षेत्र बताते हुए मामला लटका रहा। इसके बाद चिल्हिया पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा और केस दर्ज किया। गांव के लोगों का कहना था कि पुलिस कार्रवाई करने के बजाए आपस में ही कार्यक्षेत्र के विवाद में उलझी रही। अगर सक्रिय रहती तो झोलाछाप भी उसी समय पकड़ लिया गया होता। घटना होने के बाद पुलिस उलझी रही और वह क्लिनिक बंद करके भाग निकला।