‘सीएमओ साहब, मैं बहुत बदतमीज कलेक्टर हूं। डॉक्टरों से कह दीजिए कि रवैया सुधार लें। समय से उपस्थित होकर मरीजों का इलाज करें। अब मनमानी नहीं चलेगी।’ सोमवार को जिला अस्पताल के औचक निरीक्षण में खामियों से खिन्न डीएम नरेंद्र शंकर पांडेय ने कुछ ऐसे ही शब्दों में अपनी नाराजगी जाहिर की। चिकित्सा, साफ-सफाई, दवा वितरण सहित अन्य व्यवस्थाओं पर डीएम बेहद नाराज दिखे। उन्होंने जिम्मेदारों को जमकर फटकारा।
इस दौरान अनुपस्थित सीएमएस समेत डेढ़ दर्जन डॉक्टरों व चिकित्सा कर्मचारियों के एक दिन का वेतन काटने का निर्देश दिया। सुबह सवा आठ बजे डीएम निरीक्षण पर पहुंचे तो जिला अस्पताल में अभी झाड़ू ही लग रहा था।
ओपीडी के कमरा नंबर 1 से 7 सहित किसी भी कमरे में डॉक्टर नहीं थे। सीएमएस के बारे में पूछा तो वे खुद नदारद थीं। तुरंत सीएमओ डॉ.जीसी श्रीवास्तव को तलब करते हुए सीएमएस पद के लिए किसी तेज-तर्रार योग्य डॉक्टर का नाम सुझाने का निर्देश दिया। कहा कि मुझे काम चाहिए जूनियर्टी-सिनियर्टी नहीं।
जो काम करेगा, वही यहां रहेगा। सफाई कर्मचारियों को हिदायत दी कि अस्पताल खुलने से पहले सफाई कार्य हर हाल में हो पूरा हो जाना चाहिए। दोबारा निरीक्षण में गड़बड़ी मिली तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई तय है।
डीएम ने इमरजेंसी वार्ड, जनरल वार्ड, आईसीयू, औषधि भंडार कक्ष, एक्स-रे कक्ष, प्रसूता वार्ड का जायजा लिया। चिकित्सक के अभाव में अल्ट्रासाउंड कक्ष बंद होने पर डॉ.जेपी गुप्ता, एसपी त्रिपाठी को हिदायत दी कि अल्ट्रासाउंड कक्ष की प्रत्येक दिन साफ-सफाई हो और प्रतिदिन समय से अल्ट्रासाउंड कक्ष खुले-बंद हो।
प्रसूता कक्ष में डॉ.संगीता पांडेय नदारद थीं। उनके एक दिन का वेतन काटने का निर्देश दिया। औषधि भंडार कक्ष में दवाओं के अंकन और ओपीडी में दिए जा रहे दवाओं की बैलेंस सीट में इंट्री नहीं दर्शाई गई थी। इस पर जिलाधिकारी ने स्पष्टीकरण मांगा।
इमरजेंसी वार्ड में स्टॉक अंकन रजिस्टर उपलब्ध न होने पर फार्मासिस्ट ओपी श्रीवास्तव से स्पष्टीकरण मांगा। निरीक्षण के दौरान डीएम ने सीएमओ को हिदायत दी कि डॉक्टर अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाएं। समय से उपस्थित होकर मरीजों का उपचार करें। इस मौके पर डॉ.संजय चौधरी, डॉ.एके ओझा, डॉ.मनोज गुप्ता, डॉ.राजेश मोहन गुप्ता, डॉ.एसएन पटेल आदि मौजूद रहे।