नवजात का शव मिलने के प्रकरण में कानून के जानकार बोले, पुलिस की कार्यशैली अपराध की श्रेणी में
सिद्धार्थनगर। गडरखा गांव के टोला मोहनकोली में नवजात का शव मिलने के मामले में पुलिस तहकीकात और कार्रवाई करने से पीछे हट रही है। तीन दिन बाद भी पुलिस ने केस नहीं दर्ज किया। कानून के जानकार कहते हैं कि इस मामले को दबाने के लिए पुलिस की कार्यशैली, उसे अपराध की श्रेणी में ला रही है।
इस प्रकरण में मंगलवार को गांव का एक व्यक्ति थाने में तहरीर देने पहुंचा था। पुलिस ने उसे यह कहकर लौटा दिया कि इस मामले में कोई केस ही नहीं बनता। ढेबरूआ थाना क्षेत्र के मोहनकोली गांव में 31 जनवरी की सुबह छह बजे एक घर के सामने गड्ढे में नवजात का शव मिला था। सबसे पहले शव देखने वाली महिला ने ग्रामप्रधान को सूचना दी थी।
एसएचओ ब्रह्मा गौड़ की मौजूदगी में पुलिस ने पंचनामा भरवाकर शव को दफन करा दिया था। पुलिस के घटनास्थल से लौटने के बाद दो परिवारों में, इस मामले के चलते मारपीट तक की नौबत आ गई थी।
इस बारे में आईजी बस्ती राजेश मोदक ने कहा कि संबंधित थाने से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। प्रकरण में विधि के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद यदि यह संज्ञान में आता है कि किसी स्तर से लापरवाही हुई है तो उसके लिए जिम्मेदारों पर भी कार्रवाई भी की जाएगी।
‘असामान्य मौत में पोस्टमार्टम जरूरी’
सेवानिवृत्त एएसपी मुन्ना लाल चौधरी कहते हैं कि पहली बात तो किसी की भी मृत्यु हो, शव को दफन करना चाहिए या फिर दाह करना चाहिए। अगर असामान्य मौत होती है तो पोस्टमार्टम जरूरी है। चाहे वह नवजात का शव हो या फिर अन्य व्यक्ति का। पोस्टमार्टम होगा तो मौत की असल वजह सामने आएगी। असामान्य मौत थी, इस लिए नवजात के शव का भी पुलिस को पोस्टमार्टम कराना चाहिए था। साथ ही अगर तहरीर लेकर कोई गया था तो केस दर्ज करके जांच शुरू करनी चाहिए। कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं होगा तो पुलिस ही दोषी हो जाएगी।
‘पोस्टमार्टम न करा, शव दफन कराकर की गई गलती’
जनपद न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता संजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि नवजात के जन्म को छिपाना ही अपराध है। अगर उसकी मौत असामान्य स्थिति में है तो पुलिस को पहले पोस्टमार्टम कराना चाहिए था। पुलिस ने इस मामले में पोस्टमार्टम कराने के बजाय, शव को दफन करवा दिया, जो गलत है। शिशु के असामान्य मौत और उसको छिपाने में आईपीसी की धारा 318 के तहत केस दर्ज करना चाहिए। इसमें कम से कम 10 वर्ष की कारावास की सजा का प्रावधान है। वहीं, अगर बच्चे का सिर गायब है और हाथ कटा हुआ मिला है और उसे मिट्टी में दबाया गया था तो इससे हत्या की आशंका है। इसमें आईपीसी की धारा 302 के तहत केस दर्ज कराकर पोस्टमार्टम कराना चाहिए था। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होनी चाहिए थी। इस मामले में पुलिस का शिथिल रवैया उसकी कार्यशैली पर सवाल उठा रहा है। पुलिस, कार्रवाई करने के बजाय मामले को दबाने की कोशिश की है, जो अपराध की श्रेणी में आती है।