फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बगावत कर चुनावी अखाड़े में उतरे नेता तो बदल जाएंगे समीकरण

विज्ञापन
विज्ञापन
बगावत कर चुनावी अखाड़े में उतरे नेता तो बदल जाएंगे समीकरण
विज्ञापन

सिद्धार्थनगर। चुनाव से पहले चल रहे दलबदल के खेल के साथ टिकटों की लिए मारामारी मची हुई है। विभिन्न दलों के दावेदार अपनी उम्मीदवारी पक्की करने के लिए जी जान से जुटे हुए हैं। टिकटों की दौड़ में शामिल और चर्चा में चल रहे नामों से अलग नेताओं की एक ऐसी जमात भी है, जो इन राजनीतिक गतिविधियों पर अपनी पैनी नजर लगाए हुए हैं। ऐसे नेताओं का नाम चर्चा में भले ही न हो, लेकिन वे अंदरखाने से राजनीतिक दलों में अपनी गोटियां सेट करने में लगे हैं। इनका दांव कामयाब होता है या नहीं, यह तो टिकटों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही पता चल पाएगा, लेकिन इनके जो तेवर हैं, वह भविष्य में पार्टी से बगावत करके चुनाव में खासा नुकसान पहुंचाने वाले हैं।
जिले की पांचों विधानसभा क्षेत्रों में ऐसे नेताओं की मौजूदगी है, जो अभी चुनावी हलचल से दूर तो दिख रहे हैं, लेकिन लखनऊ से लेकर दिल्ली तक उनकी दौड़ जारी है। राजनीति के संगम में डुबकी लगाने की चाह दिल में लिए इन नेताओं पर सबकी नजर टिकी हुई। इनमें कुछ नेता विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन इस बार उनकी गोटी पुरानी पार्टियों में फिट होती नहीं दिख रही। वहीं पहली बार चुनाव में उतरने की चाह लिए नेताओं की भी अच्छी खासी तादाद है, जो चुनावी रण में जोर आजमाइश करना चाह रहे हैं। यह स्थिति जिले के हर विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिल रही है। वहीं राजनीति के जानकारों की नजर उन नेताओं के रुख पर भी टिकी है, जिन्हें उनकी पार्टियों से टिकट नहीं मिलेगा। उसके बाद क्या वह अपनी पार्टी में बने रहेंगे या फिर कोई और राजनीतिक ठिकाना ढूंढ कर चुनावी मैदान में कूदेंगे। राजनीतिक समीकरण बनाने बिगाडने में इन नेताओं की भूमिका को कमतर करके नहीं आका जा सकता।
विज्ञापन

ऐसी है विधानसभा क्षेत्रों में रस्साकशी
डुमरियागंज विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो यहां तीन से चार ऐसे नाम हैं, जो अपनी चुनावी चाल, चुपचाप चल रहे हैं। वहीं इटवा में विधानसभा का चुनाव लड़ चुके एक नेता का रूख क्या होगा? यह अभी स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। बांसी विधानसभा क्षेत्र में सत्ताधारी दल से ज्यादा विपक्षी दलों में टिकटों के मारामारी दिख रही है। जिन दावेदारों को टिकट नहीं मिलेगा, उनका अगला राजनीतिक कदम, चुनावी समीकरण जरूर प्रभावित करेगा।
कपिलवस्तु विधानसभा क्षेत्र में सभी दलों में टिकटों की चाह रखने वाले नेताओं की संख्या अधिक है। जिनका टिकट कटता है, उन नेताओं का रुख क्या होगा? यह देखने वाली बात होगी। वहीं इसी कड़ी में टिकटों के लिए सबसे ज्यादा होड़ शोहरतगढ़ विधान सभा में देखने को मिल रही है। सारे प्रमुख दलों में कई दावेदार आखिरी समय में टिकटों की चाह में अपना दम-खम लगा रहे हैं। यहां पूर्व विधायक से लेकर विधानसभा चुनाव लड़ चुके और पहली बार टिकट की चाह रखने वाले नेताओं में रस्साकशी चल रही है।
विज्ञापन

हर कोई अपनी दावेदारी पक्की करने के लिए पूरी शिद्दत से जुटा हुआ है। फिलहाल इन नेताओं का रुख, टिकटों की घोषणा होंने के बाद से लेकर नामांकन प्रक्रिया शुरू होने पर ही स्पष्ट होगी। अगर इनमें से कुछ नेता बगावती तेवर अपना कर चुनाव मैदान में कूदते हैं तो अच्छे-अच्छे नेताओं का चुनावी गणित प्रभावित जरूर करेंगे और खुद की नाव राजनीति के भवसागर में भले ही पार न करा पाएं लेकिन कुछ की डूबा जरूर देंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें