कुछ के बिगड़ेंगे खेल तो कइयों को मौका
आरक्षण के कारण मैदान से बाहर होने की संभावना से ब्लॉक प्रमुख के दावेदार बेचैन
25 वर्ष में सिर्फ एक बार जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर काबिज रहा सामान्य वर्ग
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिला पंचायत अध्यक्ष पद अनारक्षित होने के बाद 14 ब्लॉकों के प्रमुख पद के आरक्षण की घोषणा अभी बाकी है, लेकिन दावेदार अभी से बेचैन है। आरक्षण के चक्र में कुछ दावेदारों के खेल बिगड़ेंगे तो कुछ को मौका मिलेगा।
जिले के 14 ब्लॉकों में वर्ष 2015 में छह अनारक्षित, तीन महिला वर्ग, दो पिछड़ा वर्ग, एक पिछड़ा वर्ग महिला, एक अनुसूचित जाति और एक ब्लॉक प्रमुख अनुसूचित जाति महिला के आरक्षित रहा। इस वर्ष भी आरक्षण का अनुपात पूर्ववत रहेगा, लेकिन कौन से ब्लॉक का प्रमुख पद किस वर्ग के लिए आरक्षित होगा, अभी यह तय नहीं हो सका है। इससे ब्लॉक प्रमुख पद के आरक्षण प्रक्रिया का इंतजार कर रहे दावेदारों में काफी बेचैनी है। आलम यह है कि वह राजनीतिज्ञों, अधिकारियों के साथ ही अपने सूत्रों से लगातार संपर्क कर मंथन कर रहे हैं। प्रमुख पद के दावेदार आरक्षण की जानकारी किए बिना क्षेत्र पंचायत सदस्य पद (बीडीसी) का चुनाव लड़ने के संबंध में असमंजस में हैं। कुछ दावेदार आरक्षण निर्धारित होने के पहले ही किसी ऐसे सुरक्षित बीडीसी क्षेत्र की तलाश में जुटे हैं, जहां से उन्हें चुनाव जीतने में दिक्कत न हो। इस बाबत डीपीआरओ आदर्श का कहना है कि पंचायत पदों के लिए निर्धारित आरक्षण प्रक्रिया के तहत पदों का आरक्षण घोषित किया जाएगा। जिस पद दावे, आपत्तियों का निस्तारण कर अंतिम सूची जारी होगी।
25 वर्ष में एक बार काबिज रहा सामान्य वर्ग
भले ही 1995 से 2020 तक जिला पंचायत अध्यक्ष पद दो बार अनारक्षित रहा, लेकिन इस पद पर 1995 में मोहम्मद सईद भ्रमर को छोड़कर कोई सामान्य वर्ग काबिज नहीं हो सका। वर्ष 2010 में अनारक्षित होने के बावजूद पिछड़े वर्ग से आने वाले प्रमोद यादव और उसके बाद पूजा यादव अध्यक्ष पद पर काबिज रहीं। 25 वर्ष में 15 वर्ष तक जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर पिछड़ा वर्ग का ही दबदबा रहा। अब एक बार फिर से सामान्य वर्ग को मौका तो मिला है, लेकिन देखना होगा कि इस पद पर सामान्य वर्ग काबिज होने में सफल रहता है या फिर यह कुर्सी किसी अन्य वर्ग के हत्थे चढ़ जाएगी।
382 गांवों की मुखिया होंगी महिलाएं
जिले की 1136 ग्राम पंचायतों के प्रधान पद के आरक्षण की घोषणा होना अभी बाकी है, लेकिन शासन से मिले निर्देशों के क्रम में 382 ग्रामों के प्रधान पद पर महिलाओं का काबिज होना तय है। आरक्षण प्रक्रिया के अनुसार अनुसूचित जनजाति महिला तीन, अनुसूचित जनजाति पांच, अनुसूचित महिला 66, अनुसूचित जाति 123, पिछड़ा वर्ग महिला 106, पिछड़ा वर्ग 199, महिला 207 और 427 ग्राम पंचायतों के प्रधान पद अनारक्षित होंगे। इस तरह सभी वर्ग में महिला के लिए ग्राम प्रधानों के 33 प्रतिशत से अधिक महिलाओं के आरक्षित होंगे।