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Siddharthnagar News: बेसमेंट में चल रहे अस्पताल, कोचिंग और शॉपिंग माॅल, मंडरा रहा खतरा

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फब्बारा तिराहा के निकट बेसमेंट वाला काम​र्शियल भवन। संवाद
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बस्ती। बड़े हादसे सामने आने के बाद भी शहर के कई शॉपिंग मॉल, कोचिंग सेंटर और निजी अस्पताल बेसमेंट में संचालित किए जा रहे हैं। यहां आने-जाने वाले लोगों के सिर खतरा हर समय मंडराता है। क्योंकि शहर की अधिकांश कामर्शियल बिल्डिंगों के पास प्रवेश और निकासी के लिए एक ही रास्ता है। बेसमेंट में भी सुरक्षा के मानकों का पालन ठीक से नहीं हो रहा है। आवाजाही के लिए कंकरीट की सीढि़यां काफी संकरी हैं।
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कोचिंग और लाइब्रेरी की स्थिति और खराब है। बेसमेंट और प्रथम तल पर संचालित कोचिंग और लाइब्रेरी में बच्चों के आवाजाही के लिए तीन से चार फीट चौड़ी सीढि़यां लगी हैं। इन संस्थानों के पास एनओसी भी नहीं है। दो दिन पहले लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में हुए हादसे के बाद प्रशासन अलर्ट हुआ तो अधिकांश कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरी फिलहाल बंद हो गए हैं। जानकारों का कहना हैं कि संचालकों को अब माहौल ठंडा होने का इंतजार है।
बृहस्पतिवार को शहर के मालवीय मार्ग, आवास विकास समेत कई मोहल्लों में कामर्शियल बिल्डिंग में कोचिंग और लाइब्रेरी सेंटरों पर ताला लगा रहा। शहर के रौतापार निवासी पंकज उपाध्याय बताते हैं कि बिल्डिंग निर्माण के समय ही लोगों को सुरक्षा के मानक पर ध्यान देना चाहिए। अधिक किराए वसूलने के चक्कर में बेसमेंट के साथ बहुमंजिला इमारत खड़ी की जा रही है। चार से पांच फिट चौड़ाई वाली सीढि़यों से कई अस्पताल, शॉपिंग मॉल में तमाम लोगों का आना-जाना बना हुआ है।
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वहीं मड़वानगर के राजेश पांडेय ने बताया कि आवासी भूखंड पर भी कामर्शियल निर्माण किए जा रहे हैं। कामर्शियल उपयोग के निर्माण में उसी तरह के सुरक्षा के इंतजाम भी होने चाहिए। अस्पताल, कोचिंग, लाइब्रेरी, शॉपिंग मॉल संचालित होने वाली बिल्डिंग में प्रवेश और निकासी के लिए अलग- अलग रास्ते जरूरी होते है। लेकिन, एक ही रास्ते पर कई कामर्शियल बिल्डिंगों को फायर एनओसी मिल जाती है। मानचित्र भी पास हो जा रहा है। इसीलिए सुरक्षा के मानकों का पालन नहीं हो पा रहा है।
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इन जगहों पर हैं बेसमेंट वाले बिल्डिंग
शहर के जिला अस्पताल से ओपेक चिकित्सालय कैली मार्ग पर आधा दर्जन भवनों के बेसमेंट अस्पताल, डायग्नोस्टिक सेंटर के रूप में कामर्शियल उपयोग में लाए जा रहे हैं। यहां एक- दो बार बीडीए की तरफ से नोटिस देने की कार्रवाई भी की गई है। मगर बाद में मामला शांत हो गया है। बेसमेंट में धड़ल्ले से अस्पताल और डॉयग्नोस्टिक सेंटर चलाए जा रहे हैं। इसी तरह पचपेड़िया मार्ग पर भी बेसमेंट और संकरे एकल रास्ते वाले तीन से चार मंजिला इमारतों में लाइन से अस्पताल संचालित किया जा रहा है। यदि आगजनी या अन्य कोई घटना हुई तो इन भवनों में मौजूद लोगों का सुरक्षित बाहर निकलना कठिन हो जाएगा। इसी तरह आवास विकास मोड़ पर भी आधा दर्जन बिल्डिंगों में दूसरे या तीसरे महले पर आने-जाने के लिए सकरा जीना बनवाया गया है। इसी रास्ते से कोचिंग और लाइब्रेरी में पढ़ने वाले बच्चे आ-जा रहे हैं।
कोट
कामर्शियल भवनों में सुरक्षा के मानक का पालन कराने के लिए जांच के आदेश दिए गए हैं। पुलिस, अग्निशमन और शिक्षा विभाग की टीम संयुक्त रूप से अभियान चला रही है। जिनके भवनों में सुरक्षा के मानक का पालन होते नहीं मिलेगा उनके विरुद्ध नोटिस देने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
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-प्रतिपाल सिंह चौहान, एडीएम।
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