खाद के लिए किसानों ने डुमरियागंज-रुधौली मार्ग को किया जाम
सिद्धार्थनगर। खाद के संकट से नाराज किसानों का धैर्य मंगलवार को जवाब दे गया और उन्होंने डुमरियागंज-रुधौली मार्ग पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया। बाद में पुलिस ने समझाकर किसानों को शांत कराया।
गेहूं की बुवाई के समय पर जिले में डीएपी की किल्लत से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। एक-एक बोरी खाद के लिए परेशान हैं। भोर से दोपहर तक लाइन में खड़े होने के बाद उन्हें मायूसी हाथ लग रही है। सुबह चूल्हा-चौका संभालने वाली महिलाएं डीएपी के लिए लाइन में खड़ी हो जा रही हैं। उनका कहना है कि एक दिन भूख रहने से पूरे साल के लिए उपज का इंतजाम हो जाएगा, इस लिए लाइन में लग रही हैं। सरकार को खाद की किल्लत पर ध्यान देने की जरूरत है।
जिले की बड़ी आबादी खेती पर आश्रित है। यहां किसान मुख्य रूप से दो फसल उगाते हैं। इसमें गेहूं और धान प्रमुख है। बुवाई के समय समितियों से खाद का न मिलना किसानों के लिए दुख की बात है। जिले में खाद की कमी बरकरार है। बिजौरा प्रतिनिधि के अनुसार, बिजौरा साधन सहकारी समिति पर मंगलवार सुबह से ही डीएपी आने की सूचना पर किसानों की भीड़ जुट गई। समिति के सचिव रघुनाथ व सहायक सचिव रामवृक्ष वर्मा की देखरेख में प्रति बोरी डीएपी 1230 रुपये में आधारकार्ड लाने वालों को दी जा रही है। किसान गौरव पांडेय, कपिलदेव, विकास, राजकुमार, सुक्खा आदि ने बताया साधन सहकारी समिति पर खाद की बोरी 1230 में मिलती है। वहीं प्राइवेट दुकानों पर 1400 में बिक रही है।
भारतभारी प्रतिनिधि के अनुसार, डुमरियागंज तहसील क्षेत्र की नगर पंचायत भारतभारी के बढ़नी कोल्ड स्टोर पर मंगलवार को भोर में तीन बजे से ही किसानों ने डीएपी के लिए लाइन लगा दी। सुबह होते होते संख्या बढ़ गई। सैकड़ों की संख्या में महिला व पुरुष पहुंच गए। दोपहर बारह बजे के करीब लोगों को पता चला कि डीएपी नहीं बांटी जाएगी। तब किसानों में नाराजगी बढ़ गई। कृषक केंद्र पर किसानों ने हंगामा शुरू कर दिया। समिति पर किसानों ने कर्मचारियों से ताला बंद करने के लिए कहा। देखते ही देखते किसान सड़क पर उतर आए। डुमरियागंज-रुधौली मार्ग जाम कर दिया। पुलिस के समझाने के बाद सड़क जाम खत्म किया गया।
जुड़वानिया निवासी मंजू देवी का कहना है चूल्हा-चौका छोड़कर दो दिन से लगातार आ रही हूं। मगर डीएपी नहीं मिल रही है। ठंडक में 15 किलोमीटर की दूरी तय करके यहां आई हूं, मगर निराशा ही हाथ लग रही है। दो बच्चों को घर पर छोड़ कर आई हूं। एक पट्टीदार के जिम्मे बच्चों को करना पड़ा है। कुसम्ही निवासी रेनू देवी ने कहा कि चूल्हा छोड़ कर आई हूं खाद लेने। बच्चों के लिए घर में चना भिगोकर आई हूं कि बच्चे उठ कर वहीं खा लेंगे। बच्चों को देवरानी के पास छोड़कर आई हूं। पति मुंबई में काम करते हैं। दो दिन से आ रही हूं। खाद नहीं मिल रही है। खेत की नमी की चिंता सता रही है।
देवरिया निवासी कलावती का कहना था कि अगर खाद नहीं मिलेगी तो खेती नहीं हो पाएगी। खाने का संकट आ जाएगा। जमौती निवासी अफसाना का कहना है घर में मैं और तीन बच्चे हैं। घर का काम छोड़कर भोर में पांच बजे से नंबर लगा रखी हूं। बच्चों को जेठ के घर छोड़ आई हूं। पति बाहर रहते हैं। खाद का संकट बढ़ता जा रहा है। आज भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। धेंसा प्रतिनिधि के अनुसार, गेहूं की बुवाई का समय आते ही सरकारी समितियों से डीएपी गायब हो गई। उस कारण किसानों को अत्यंत कठिनाई हो रही है। प्राइवेट दुकानदार इसका खूब लाभ उठा रहे हैं। 300 रुपये में बिकने वाली सुपर फास्फेट खाद 400 रुपये में और 265 रुपये बोरी की यूरिया 300 में बिक रही है। इसके बावजूद खाद सही है, इसकी कोई गारंटी नहीं है।
इसी कारण प्रत्येक किसान सहकारी समितियों के खाद पर भरोसा करता है, लेकिन उसकी आशाओं पर विभागीय उदासीनता ने पानी फेर दिया है। आलम यह है कि क्षेत्रीय सहकारी समिति सिरवंत, धेंसा नानकार पर 10 दिनों से खाद नहीं आई, जिससे गेहूं की बुआई अधर में लटकी हुई है। क्षेत्रीय किसान सच्चिदानंद त्रिपाठी, घनश्याम शुक्ल, सत्यनारायण मिश्र, मनोज शर्मा, बाबूलाल आदि ने सहकारी समिति धेन्सा नानकार पर डीएपी उपलब्ध कराने की मांग की है। इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी सीपी सिंह ने बताया कि खाद का रैक आनी शुरू हो गई है। किसानों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी।
30 हजार बोरी खाद आई, दूर हो सकती है किल्लत
जिले में बढ़ती हुई खाद की किल्लत के बीच किसानों के लिए अच्छी खबर है। 30 हजार बोरी डीएपी जनपद में देर शाम तक पहुंच गई है। तीन दिन के भी तक 40 हजार बोरी और डीएपी आने का अनुमान है। माना जा रहा है कि उसके बाद खाद की समस्या दूर हो सकती है। जिला कृषि अधिकारी सीपी सिंह ने बताया कि 30 बोरी डीएपी आई है। अभी और खाद आने की अनुमान है। खाद की कोई कमी नहीं होने पाएगी।