गरुड़ में धान की कटाई करतीं महिलाएं।
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सिद्धार्थनगर। धान बिक्री को लेकर किसानों में रुचि नहीं दिख रही है। एक नंवबर से जिले में धान की खरीद शुरू होनी है। मगर अभी तक जिले में महज 250 किसानों ने ही अपना ऑनलाइन पंजीकरण करवाया है। यह स्पष्ट निर्देश है कि बिना पंजीकरण के किसान धान नहीं बेच सकेंगे, बावजूद किसानों की उदासीनता विभाग को लक्ष्य पूरा करने के लिए कठिनाई में डाल देगी।
किसानों को उपज का वाजिब मूल्य दिलाने और धान खरीद की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने ऑनलाइन पंजीयन को अनिवार्य किया है। इसके तहत वही किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर धान बेच सकेंगे, जिनका अग्रिम पंजीकरण होगा। यह तरीका किसानों के लिए भी काफी उपयोगी है। इससे उन्हें कई दिनों केंद्र पर लाइन लगाने की जरूरत नहीं होगी। भुगतान भी पूरा मिल सकेगा। मगर पंजीयन की प्रक्रिया में किसान कोई रुचि नहीं ले रहे। जिले में एक नवंबर से धान की खरीद शुरू होनी है, लेकिन अभी तक महज ढाई सौ किसानों ने ही पंजीकरण करवाया है। सरकार इसका व्यापक रूप से प्रचार-प्रसार करवा रही है। विपणन विभाग व ग्राम पंचायतों को गांव में कैंप लगाकर ऑनलाइन पंजीकरण के लिए किसानों को जागरुक करने का निर्देश भी मिला था।
विभाग का दावा है कि प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है। बावजूद किसानों का पंजीयन में रुचि न लेना समझ से परे है। अगर पंजीकरण की यही दशा रही तो शासन से मिले खरीद लक्ष्य को पूरा करने में विभाग के समक्ष बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी। जिले में 66 क्रय केंद्रों 65300 मीट्रिक टन धान की खरीद का लक्ष्य दिया गया है। किसानों की उदासीनता ने विभाग की बेचैनी बढ़ा दी है। इस संबंध में जिला विपणन अधिक एसके पांडेय ने बताया कि प्रचार-प्रसार के माध्यम से किसानों को ऑनलाइन पंजीकरण के लिए जागरुक किया जा रहा है। किसान पंजीकरण करा रहे हैं।