670 गांवों में बिजली के तार बदले जाएंगे
अभी चल रहा सर्वे, 15 मार्च से होगा काम शुरू
35 करोड़ की लागत से तार बदलेंगे की योजना
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जर्जर बिजली तार बदल कर एबीसी केबल लगाने के लिए एक वर्ष पूर्व जिले के एक हजार से अधिक आबादी वाले 670 गांव चिह्नित हुए थे। टेंडर प्रक्रिया में देरी के कारण अभी तक इन गांवों में सर्वे कार्य हो रहा है। जबकि गर्मी मौसम शुरू होने से लोगों की परेशानी बढ़ेगी ही जर्जर बिजली तार बदलने में भी अड़चन आएगी। खैर 15 मार्च से काम शुरू होने की बात कही जा रही है।
जिले मेें कई ऐसे गांव है जिनका विद्युतीकरण 40 वर्ष पूर्व हुआ था, इन गांवों तक जाने वाले बिजली तार जर्जर हो चुके है। इससे आए दिन तार टूटकर गिरने से दुर्घटनाएं तो होती ही हैं, इससे होने वाले लोकल फाल्ट से संबंधित क्षेत्र में कई दिनों तक बिजली गुल रहती है। इस कारण बिजली निगम की तरफ से इन गांवों के बिजली के तार बदलकर एबीसी (एरियल बंडल्ड केबल) लगाने की प्रक्रिया शुरू हुई है। इसके तहत एक वर्ष पूर्व जिले के एक हजार से अधिक आबादी वाले 670 गांवों को चिह्नित किया गया था। इन गांवों के तार बदलने के लिए बिजली निगम के डिस्कॉम मुख्यालय वाराणसी से छह माह पूर्व टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई, जिसमें देरी होने से एक माह पूर्व टेंडर प्रक्रिया पूर्ण हो सकी। अब जाकर कार्यदायी संस्था मेसर्स एके इंफ्रा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड ने इन गांवों का सर्वे कार्य शुरू किया है। इस बाबत अधीक्षण अभियंता बिजली एके श्रीवास्तव ने बताया कि जर्जर तार बदलने के लिए संबंधित गांवों में सर्वे कार्य किया जा रहा है। कार्यदायी संस्था 15 मार्च से तार बदलने की प्रक्रिया शुरू कर देगी।
जर्जर तार टूटने से हो चुके हैं हादसे
जर्जर बिजली तार टूटकर गिरने से जिले में कई हादसे हो चुके हैं। आठ वर्ष पूर्व शहर के सिद्धार्थ तिराहे पर बिजली के तार टूटकर गिरने से एक बाइक सवार की मौके पर ही मौत हो गई थी। पांच वर्ष पूर्व बांसी कस्बे में लटक रहे हाईटेंशन बिजली तार की चपेट में आने से ट्रक सवार मजदूर की मौत हो गई थी। इसी तरह तीन वर्ष पूर्व शोहरतगढ़ क्षेत्र में खेत में टूटकर गिरे बिजली तार की चपेट में आने से तीन पशुओं की मौत हो गई थी।