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Siddharthnagar News: बरसात में सताएगा कान का फंगस, सफाई पर दें ध्यान

Thu, 02 Jul 2026 01:59 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। मानसून की दस्तक के साथ जिले में कान से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ने लगी हैं। गर्मी के बाद बारिश के मौसम में वातावरण में बढ़ी नमी के कारण कान में फंगल संक्रमण यानी ओटोमाइकोसिस के मामले अधिक सामने आते हैं। खुजली, दर्द, कान बंद होने का एहसास, पानी या मवाद निकलना और सुनने में कमी इसके प्रमुख लक्षण हैं। ऐसे में कान को लेकर सतर्क रहने और बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
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ईएनटी सर्जन का कहना है कि लोग अक्सर खुजली होने पर माचिस की तीली, हेयरपिन, चाबी, रुई की डंडी या अन्य नुकीली वस्तुओं से कान साफ करने लगते हैं, जिससे संक्रमण और गंभीर हो जाता है। कई मामलों में कान से खून निकलने या पर्दा क्षतिग्रस्त होने तक की नौबत आ जाती है। ऐसे में आने वाले मौसम को लेकर बचने की जरूरत है।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल बांसी की ईएनटी ओपीडी में इन दिनों कान में खुजली, दर्द और फंगस की शिकायत लेकर मरीज पहुंच रहे हैं। अभी तक तो एक दो की संख्या है लेकिन बारिश का दौर शुरू होने के साथ 20 प्रतिशत मरीज इसी समस्या वाले हो जाते हैं। चिकित्सकों के अनुसार, बरसात के दौरान कान में पानी चले जाने, लंबे समय तक नमी बने रहने, गंदे ईयरफोन का इस्तेमाल, बार-बार कान कुरेदने और बिना डॉक्टर की सलाह के दवा डालने से संक्रमण तेजी से फैलता है। समय पर इलाज न मिलने पर सुनने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है, इसलिए शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही ईएनटी विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।
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बांसी जिला अस्पताल में तैनात नाक, कान और गला रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय शर्मा ने बताया कि बारिश के मौसम में कान को सूखा रखना सबसे जरूरी है। नहाने या बारिश में भीगने के बाद कान में पानी रह जाने से फंगस तेजी से पनपता है। यदि लगातार खुजली, दर्द, बदबू, पानी आना या सुनाई कम देना जैसी समस्या हो तो स्वयं इलाज करने के बजाय तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। बिना जांच के कान में कोई भी ड्रॉप डालना नुकसानदायक हो सकता है। कान की सफाई के लिए किसी भी नुकीली वस्तु का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इससे कान की त्वचा छिल जाती है और संक्रमण गहरा हो सकता है। कई बार कान का पर्दा भी क्षतिग्रस्त हो जाता है, जिससे खून निकलने के साथ सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। कान की प्राकृतिक वैक्स परत संक्रमण से बचाने का काम करती है, इसलिए अनावश्यक सफाई से भी बचना चाहिए।
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