बाढ़ की तबाही के बीच जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में ‘सूखा’
सिद्धार्थनगर। पहले कोरोना की दहशत, अब बाढ़ की तबाही से ब्लड बैंक सूखने लगे हैं। महीने भर से रक्तदान शिविर नहीं लगाए जाने से जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में खून की लगातार कमी होती जा रही है। ए पॉजिटिव, बी पॉजिटिव का अभाव बना हुआ है। मरीजों के इलाज में मुश्किलें खड़ी हो रही हैं।
बीते कई माह से कोरोना के कारण पास-पड़ोस के लोगों की बात दूर, अपने परिजन भी खून देने से कतराते रहे। ब्लड बैंक में पर्याप्त खून नहीं होने से जरूरतमंदों को खून मिलने में परेशानी हो रही है। खून की कमी का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि संयुक्त जिला अस्पताल के ब्ल्ड बैंक में फिलहाल सात यूनिट ब्लड ही है। ए पॉजिटिव, बी पॉजिटिव की घोर कमी है। इस ग्रुप के मरीजों को रक्त लेने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। जबकि यहां की क्षमता इससे कई अधिक की है। इधर एक पखवारे से जिले में बाढ़ की तबाही से रक्तदान शिविर नहीं लग पा रहा है।
इतना ही नहीं, रक्तदाता भी बाढ़ प्रभावित गांवों में फंसे हुए हैं। अगर आगे कुछ दिनों तक रक्तदान शिविर नहीं लगे तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. मनोज त्रिपाठी ने बताया कि शरीर से निकाला गया खून केवल 35 दिनों तक सही रहता है। उसके बाद उसे डिसकार्ड (नष्ट) करना पड़ता है। सावधानी से रक्तदान करने में कोई परेशानी नहीं हो सकती है। लोग सदर अस्पताल में आकर रक्तदान करें। कम आपूर्ति के बावजूद विभाग की कोशिश होती है कि खून के कारण किसी को परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि शिविर लगाने के लिए पहल होगी। वहीं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नीना वर्मा का कहना है कि पहले कोरोना, अब बाढ़ के कारण रक्तदान शिविर का आयोजन नहीं हो पा रहा है। बाढ़ खत्म होने के बाद शिविर का आयोजन किया जाएगा।