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चुनावी व्यूह रचना में सतीश के सिर सजा ‘ताज’

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चुनावी व्यूह रचना में सतीश के सिर सजा ‘ताज’
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- 2022 के लिए ब्राह्मण मतदाताओं को साधने की हुई कोशिश, अब जिले में हुए दो मंत्री
नीरज मिश्र
सिद्धार्थनगर। योगी सरकार के मंत्रिमंडल के पहले फेरबदल में डॉ. सतीश द्विवेदी की ताजपोशी के तमाम निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे 2022 के विधानसभा चुनाव की भूमिका बताई जा रही है। माना जा रहा है कि जिले में बड़े ब्राह्मण नेता के रूप में रसूख रखने वाले सात बार के विधायक और सपा नेता माता प्रसाद पांडेय को तीसरे नंबर पर धकेल कर 2017 में चुनाव जीतने वाले डॉ. सतीश का कद बढ़ाकर भाजपा ने ब्राह्मणों को खुश करने की कोशिश की है। चूंकि दबी जुबान से ही सही, ब्राह्मणों को योगी सरकार में उचित प्रतिनिधित्व न मिलने की शिकायत थी। जिले से डॉ. सतीश को और बलिया से आनंद शुक्ल को कैबिनेट में स्थान मिलना शिकवों का दूर करने की दिशा में सकारात्मक कदम है। शपथ ग्रहण की सूचना सार्वजनिक होते ही जिले में जश्न की तैयारियां होने लगी। आम कार्यकर्ता भी इसे कार्यकर्ता का सम्मान बता रहे हैं।
यही नहीं डॉ. सतीश ने फिर राजनीति के जानकारों को चौंका दिया। इससे पूर्व 2017 के चुनाव में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय के सामने डॉ. सतीश द्विवेदी को टिकट दिए जाने पर जानकार सपा की राह आसान बता रहे थे। चुनावी नतीजे आए तो नया इतिहास बन चुका था। मूलत: संघ के कार्यकर्ता डॉ. सतीश की भाजपा के शीर्ष नेतृत्व तक मजबूत पकड़ है। यह बात उनकी ताजपोशी ने तय कर दी है।
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बढ़ गया जिले का कद
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जिले से काफी लगाव है। यह बात सरकार के मंत्री मंडल में भी दिख गई। आबकारी मंत्री के रूप में जय प्रताप सिंह को पहले ही कैबिनेट का दर्जा दिया गया है। वही, डॉ. सतीश द्विवेदी को मंत्री पद की जिम्मेदारी देकर जिले का कद बढ़ा दिया गया है।
कार्यकर्ता उत्साह में
डॉ. सतीश द्विवेदी को मंत्री मंडल में जगह मिलने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार चरम पर है। कार्यकर्ताओं को यह बात समझ आ गई है कि मेहनत करने का नतीजा पार्टी जरूर देगी। कुछ ऐसी ही चर्चा जिले के चौक-चौराहों पर हो रही है।
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विद्यार्थी परिषद से शुरू की राजनीति
एपीएन कॉलेज बस्ती से पढ़ाई। इसी दौरान 1994 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े और परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष। 2007 में विद्यार्थी परिषद से भाजपा ज्वाइन की। छह साल तक प्रशिक्षण प्रभारी रहे गोरखपुर क्षेत्र और 2013 में प्रशिक्षण प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक का जिम्मा। 2001 से 2018 तक कुशीनगर में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत रहे। 2017 में इटवा विधानसभा से टिकट मिला और चुनाव जीते। 2018 में ही जिले के बुद्ध विद्या पीठ डिग्री कॉलेज में स्थानांतरण हुआ। जहां वह सेवा दे रहे है। परिवार में माता कालिंदी देवी, पत्नी डॉ. कल्याणी द्विवेदी, लखनऊ के एक कॉलेज में प्रोफेसर हैं। एक बेटे और एक बेटी के अलावा चार भाइयों में सबसे बड़े हैं।
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