उल्टी-दस्त और डिहाइड्रेशन की आशंका बढ़ी, उथले स्रोतों से आ रहा मटमैला और बदबूदार पानी
डायरिया, उल्टी-दस्त और डिहाइड्रेशन की आशंका बढ़ी, अस्पतालों में तैयारी, दवाओं का स्टॉक और पानी की जांच तेज
सिद्धार्थनगर। बारिश के बाद एकाएक तापमान में वृद्धि और लू तराई को अपनी चपेट में ले रहा है। रविवार को अधिकतम तापमान 41 और न्यूनतम 29 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसे मौसम का दोहरा अटैक बताया जा रहा है। जो सेहत के लिए नुकसानदेह है। हाल यह हो गया है कि एक ओर दोपहर की चिलचिलाती धूप और लू लोगों को बेहाल कर रही है, वहीं दूसरी ओर गंदे और दूषित पानी की सप्लाई बीमारी का बड़ा कारण बनती जा रही है।
शहर से लेकर देहात तक कई इलाकों में पाइपलाइन लीकेज, नालियों के बीच से गुजर रही सप्लाई लाइन और उथले जल स्रोतों के कारण लोगों के घरों तक मटमैला और बदबूदार पानी पहुंच रहा है। जो कहीं न कहीं सेहत पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। वहीं, मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों की बात करें तो उल्टी, दस्त और बुखार के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। वहीं, स्वास्थ्य विशेषज्ञ मौसम को लेकर सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। वह धूप से बचने और स्वच्छ पानी पीने की सलाह दे रहे हैं।
जनपद नेपाल बाॅर्डर से लगा हुआ है, इसलिए मौसम में हाेने वाले बदलाव का असर तराई में पहले होता है। ऐसा जानकारों का मामला है और देखा भी जा रहा है। अप्रैल माह के दूसरे सप्ताह शुरू होने के साथ ही मौसम में नरमी और गर्मी के साथ बारिश के साथ उतार-चढ़ाव शुरू हो गया था। मई माह में भी दो बार अच्छी बारिश हो गई। इसके बाद मौसम में नरमी आ गई थी। लेकिन, अब दो दिनों से मौसम में तेजी से बदलाव हुआ है।
इस बदलाव का आम जनजीवन कितना असर पड़ा है, इसकी हकीकत जानने की कोशिश की गई। पहले तो अन्य दिनों तुलना में रविवार को कलक्ट्रेट मार्ग, अशोक मार्ग और उसका रोड के अलावा जिले के अन्य हिस्सों में लू का असर देखने को मिला, क्योंकि अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 29 डिग्री दर्ज किया गया। कोई छतरी लगाए हुए था तो कोई गमछे से मुंह ढककर निकलते हुए देखा गया।
वहीं, स्वास्थ्य पर कितना असर पड़ रहा है, इसके बारे में जानकारी के लिए माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में पहुंचे। स्वास्थ्यकर्मियों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से उल्टी-दस्त, तेज बुखार और कमजोरी के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। 24 घंटे में 10 से 12 मरीज गंभीर हालत में पहुंच रहे हैं। जिन्हें तेज बुखार और उल्टी दस्त की शिकायत वाले अधिक हैं।
मरीजों को छह घंटे से लेकर 24 घंटे तक भर्ती करना पड़ रहा है। वहीं, देखा गया तो मौसम को देखते हुए बेड की व्यवस्था और दवाओं की व्यवस्था की गई है। वहीं, यह भी जानकारी मिली कि अन्य दिनों की तुलना में ओपीडी में ओपीडी में भी पेट दर्द, उल्टी, बुखार और शरीर में पानी की कमी की शिकायत लेकर बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि मौसम में तेजी से बदलाव, तेज धूप और दूषित पानी का सेवन शरीर पर सीधा असर डाल रहा है। खासकर बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. एके झा ने बताया कि मौसम में बदलाव को देखते हुए तैयारी की गई है। दवाओं और बेड़ की कोई कमी नहीं है। आने वाले मरीजों के बेहतर इलाज का प्रयास किया जा रहा है।
-
दूषित पानी सेहत पर डाल सकता है असर
गर्मी के मौसम में होने वाली समस्या में पानी अहम कारण माना जाता है, ऐसा स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है। उनकी राय है कि अगर पानी में जरा सा भी गड़बड़ी है तो पेट दर्द, उल्टी दस्त सहित अन्य समस्या के शिकार हो सकते हैं। खास करके गर्मी में दिक्कत होने की संभावना अधिक है। पानी की हकीकत जानने के लिए नगर के कुछ मोहल्लों के बारे में जानकारी ली गई तो नगर के शास्त्री नगर, आजाद नगर समेत कई मोहल्लों में पेयजल पाइप नालियों और गंदे पानी के बीच से होकर गुजर रहे हैं।
वहीं, शास्त्रीनगर के रमेश कुमार, अजीत और प्रकाश ने बताया कि सुबह के समय जब सप्लाई शुरु होती है तो पानी मटमैला आता है। इसके साथ ही कई बार बदबू भी आता है। बारिश होने के बाद संकट और बढ़ जाता है। क्योंकि, बारिश के बाद जलभराव और गड्ढों में जमा दूषित पानी पाइपलाइन लीकेज से सप्लाई में आ जाता है। लोगों को परेशानी तो होती है, लेकिन पता नहीं चलता है कि हुआ क्यों। जबकि,अस्पताल में दिखाने पर डॉक्टर बताते हैं कि डायरिया, उल्टी-दस्त, टाइफाइड और डिहाइड्रेशन के पीछे पानी का शुद्ध न होना मुख्य कारण है।
-
बोले विशेषज्ञ
इस समय थोड़ी सी लापरवाही गंभीर बीमारी का रूप ले सकती है। लगातार पसीना निकलने और शरीर में पानी की कमी होने से डिहाइड्रेशन तेजी से बढ़ता है। वहीं, दूषित पानी पेट और आंतों के संक्रमण को बढ़ावा देता है। डॉक्टरों ने लोगों को धूप में निकलने से बचने, उबला या फिल्टर पानी पीने और बाहर के कटे फल व खुले खाद्य पदार्थों से दूरी बनाने की सलाह दी है।
- डॉ. एसके राव, एमडी मेडिसिन
-
मौसम को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अलर्ट है। अस्पतालों में ओआरएस, डायरिया और बुखार से संबंधित दवाओं का अतिरिक्त स्टॉक बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। अस्पताल में ओआरएस काउंटर भी बनाया गया है। अतिरिक्त बेड की व्यवस्था भी की गई है।
- डॉ. आरके चौरसिया, सीएमओ
-
विशेषज्ञों की सलाह
- कड़ी धूप और गंदा पानी से सेहत पर असर।
- शरीर में पानी की कमी से डिहाइड्रेशन और कमजोरी।
- उल्टी-दस्त और डायरिया का खतरा बढ़ता है।
- दूषित पानी से टाइफाइड और पेट संक्रमण की आशंका
- बच्चों और बुजुर्गों में संक्रमण तेजी से फैल सकता है।
-
बचाव के उपाय
- केवल उबला या फिल्टर किया पानी पीएं।
- धूप में निकलते समय सिर और शरीर को ढकें।
- ओआरएस और पर्याप्त पानी का सेवन करें।
- खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से बचें।
- पानी गंदा आने पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।