परीक्षा को लेकर अक्सर छात्रों के मन में आता है तनाव, साधारण होने के बाद घबराहट से बिगड़ता है पेपर
बोले चिकित्सक-तनाव से परीक्षा से पहले बढ़ सकती है परेशानी
सिद्धार्थनगर। बोर्ड परीक्षा से पूर्व छात्र-छात्राओं को मानसिक दबाव और तनाव का सामना करना पड़ता है। बुधवार से आयोजित होने वाली हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा को लेकर विद्यार्थियों में घबराहट की स्थिति देखी जा रही है। हालांकि चिकित्सकों का मानना है कि सही काउंसिलिंग और अभिभावकों के सहयोग से इस तनाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उनका कहना है कि परीक्षा को मन पर न होने दें हावी। अगर मन शांत रहेगा तो निश्चित ही अच्छे अंक मिलेंगे।
परीक्षा के बढ़ते दबाव का असर छात्रों के पठन-पाठन के साथ ही उनके खेलकूद और दिनचर्या पर भी पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा से ठीक पहले बच्चों को मानसिक सहारा और सकारात्मक वातावरण देना अभिभावकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। यदि माता-पिता बच्चों को समझें, उनसे खुलकर बात करें और उनका मनोबल बढ़ाएं तो वे परीक्षा संबंधी तनाव से आसानी से उबर सकते हैं।
चिकित्सकों के अनुसार, कई बार बाहरी व्यक्ति की तुलना में माता-पिता की सलाह और समझाइश का प्रभाव बच्चों पर अधिक पड़ता है। इसलिए परीक्षा के समय अभिभावकों की भूमिका एक काउंसलर की तरह होनी चाहिए जो बच्चों को संतुलित और आत्मविश्वासी बनाए रखे।
बोले चिकित्सक
परीक्षा से पूर्व बच्चों के लिए सबसे जरूरी उनका स्वास्थ्य है। जब तक शरीर स्वस्थ नहीं होगा, मन भी स्वस्थ नहीं रह सकता। शरीर की स्थिति का सीधा प्रभाव मानसिक अवस्था पर पड़ता है। बच्चों को पर्याप्त नींद लेनी चाहिए और परीक्षा के दौरान नई चीजें पढ़ने के बजाय पूरे साल पढ़े गए पाठ्यक्रम का रिवीजन करना चाहिए।
डॉ. नम्रता, एचओडी बाल रोग विभाग
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परीक्षा के समय थोड़ा-बहुत तनाव सामान्य प्रक्रिया है। खासकर हाईस्कूल के विद्यार्थियों में यह अधिक देखा जाता है। बच्चों को संतुलित और हल्का भोजन करना चाहिए। तला-भुना एवं भारी भोजन से परहेज करें ताकि पढ़ाई के दौरान उनींदापन या असहजता न हो।
डॉ. गौरव दुबे, एचओडी मेडिसिन विभाग
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परीक्षा के दौरान अनावश्यक तनाव से बचना चाहिए। माता-पिता बच्चों के सबसे अच्छे काउंसलर होते हैं। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव न बनाएं और उन्हें सकारात्मक माहौल दें। परीक्षा के दौरान मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बनाना भी बेहद जरूरी है ताकि ध्यान भंग न हो और एकाग्रता बनी रहे।
- डॉ. मो. अफजल, एचओडी मानसिक रोग विभाग