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Siddharthnagar News: पंचायत चुनाव को लेकर गांवों में बढ़े विवाद... शिकायतों की भरमार

Tue, 11 Nov 2025 01:51 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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- पूर्व में सरकारी धन के गबन के मामलों कई ग्राम प्रधानों व पंचायत सचिवों पर दर्ज हुए केस
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- वर्तमान में जिले के दो पंचायत प्रधान विहीन, 100 से अधिक गांवों में चल रही शिकायत की जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। पंचायत चुनाव की सरगर्मी के बीच गांवों में आरोप-प्रत्यारोप के साथ ही शिकायतों का दौर शुरू हो चुका है। वर्तमान में जिले के 1136 ग्राम पंचायतों में से 100 से अधिक ग्राम पंचायतों में सरकारी धन के गबन के मामले की जांच जिला स्तरीय अधिकारियों की ओर से की जा रही है। वहीं दो ग्राम पंचायतों इटवा ब्लॉक के जनिकौरा व उसका ब्लॉक के महुलानी में गबन की पुष्टि के बाद प्रधान का अधिकार छीने जाने के बाद वहां पर त्रिसदस्यीय कमेटी संचालन कर रही है।
पंचायत चुनाव की आहट के बीच गांवों में प्रधान पद के संभावित दावेदारों द्वारा एक-दूसरे के खिलाफ आरोप लगाने के साथ ही अपना माहौल बनाने का अभियान चल पड़ा है। इसी के साथ वर्तमान प्रधान के विरुद्ध भी शिकायतों का सिलसिला तेज हो गया है, जिससे कई ग्राम पंचायतों में तनाव और विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है। यहां तक कि कुछ स्थानों मारपीट की छिटपुट घटनाएं भी सामने आ रही हैं। शिकायतों की बात करें तो नौगढ़ ब्लॉक में 10 ग्राम पंचायत में शिकायत हुई, जिसमें पांच मामलों की जांच चल रही है। वहीं उसका, बर्डपुर व लोटन क्षेत्र में 11 से 15 ग्राम प्रधानों के विरुद्ध सरकारी धन के गबन की शिकायत हुई, जिसमें तीनों ब्लॉकों के 24 गांवों की जांच हो रही है। इसी तरह बढ़नी, शोहरतगढ़, जोगिया, बांसी, खेसरहा, मिठवल, भनवापुर, खुनियांव, इटवा, डुमरियागंज ब्लॉकों में भी ग्राम प्रधानों के विरूद्ध शिकायतों की लंबी फेहरिस्त है, जिसमें कई प्रधानों के विरुद्ध जिला स्तरीय अधिकारियों द्वारा जांच की जा रही है।
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बैठकों व चौपालों में कर रहे जनसंपर्क
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की घड़ियां धीरे-धीरे करीब आने के साथ ही राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। गांव की नई सरकार चुनने के लिए सियासी कड़ियां पिरोई जा रही हैं। गांवों में बैठकों, चौपालों और जनसंपर्क का दौर शुरू हो गया है। वहीं, प्रत्याशी अब सोशल मीडिया का सहारा लेकर मतदाताओं को साधने में लगे हुए हैं। फेसबुक, व्हाॅट्सएप और इंस्टाग्राम पर वीडियो संदेश, पोस्टर और स्लोगन शेयर कर ग्रामीणों को अपने पक्ष में करने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। वहीं लोग अपने ग्राम प्रधानों से उनके कार्यकाल में किए गए कार्यों का ब्यौरा मांग रहे हैं। साथ ही इन सबके बीच संभावित दावेदार अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हुए है।
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डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी मांग रहे ब्यौरा
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव वर्ष 2026 में 25 मई से पहले कराए जाने हैं। फरवरी-मार्च में आचार संहिता लागू करने की योजना बनाई जा रही है। इससे पहले चुनावी तैयारी में जुटे दावेदार डिजिटल प्लेटफॉर्म पर न सिर्फ पांच वर्ष में हुए विकास कार्य के बारे में पूछा जा रहा है बल्कि भ्रष्टाचार के बहाने में प्रधान को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है। वक्त के साथ ही पंचायत चुनाव के आयाम भी अब बदल रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म अब न सिर्फ संवाद का मंच बन गया है बल्कि गांव से जुड़ी गतिविधियों को लेकर खुलकर सवाल भी उठा रहे हैं। पंचायती राज विभाग ने गत वित्तीय वर्ष 2023-24 से डिजिटलीकरण की पहल कर सभी को मानो डिजिटल हथियार दे दिया हो। अब पंचायत चुनाव में यह डिजिटल हथियार खूब रंग लाने वाला है। गांव के हर नागरिक को डिजिटल प्लेटफॉर्म ने मुखिया बना दिया है। अब अपने प्रतिनिधि से जागरूक नागरिक बेधड़क होकर अपने गांव को सरकार से मिले धन को कहां और कैसे और क्यों खर्च किया यह पूछ रहे हैं।

यहां दर्ज हुआ 10 पर केस, चार सचिव निलंबित
इटवा ब्लॉक के ग्राम पंचायत जनिकौरा गांव में मनरेगा से कराए गए 16 कार्यों व ग्राम निधि के 20 कार्यों का स्थलीय और अभिलेख की जांच की। ग्राम पंचायत में मनरेगा से कराए गए नाली निर्माण, धोबी तालाब की खोदाई व सफाई, तालाब खोदाई, इंटरलाॅकिंग, सीसी रोड, खड़ंजा, मिट्टी के कार्य, मिनी सचिवालय में बाउंड्रीवाल, गेट निर्माण, नाली मरम्मत आदि कार्यों पर कुल 26 लाख 99 हजार रुपये के घपले की रिपोर्ट जांच टीम ने सौंपी थी। इसके बाद पुलिस ने चार सचिवों सहित नौ लोगों के खिलाफ गबन का मामला दर्ज किया था जबकि दो वर्ष में हुए गबन के दौरान यहां तैनात रहे चारों ग्राम पंचायत सचिवों को निलंबित कर दिया गया था। वर्तमान में शासन के निर्देश पर डीडीओ, एक मंडल स्तरीय अधिकारी व एक टेक्निकल अधिकारी द्वारा इस गांव का नए सिरे से जांच शुरू हो गई है।

गबन में ग्राम प्रधान हो गई जेल
बढ़नी ब्लाक के ग्रामपंचायत महादेव खुर्द में 2018-19 में तालाब की खुदाई में बरती गई। लगभग दो लाख रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितता के मामले में तत्कालीन ग्राम प्रधान को जेल भेजा जा चुका है। मौजूदा समय में वह जमानत पर बाहर हैं। सहायक निबंधक सहकारी समितियां व सहायक अभियंता जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के जांच के दौरान यह पता चला कि मनरेगा के तहत बिना कार्य कराए दो लाख 11 हजार 925 रुपये का भुगतान करना लिया गया है, जिसके बाद जिलाधिकारी ने तत्कालीन ग्राम प्रधान के विरुद्ध गबन की गई 33.33 प्रतिशत की वसूली के निर्देश दिए थे। इसके अलावा तत्कालीन डीपीआरओ ने इस वित्तीय अनियमितता में दोषी तत्कालीन ग्राम प्रधान सोहराब अली के अलावा चार ब्लाॅक कर्मचारियों पर भी केस दर्ज कराने के निर्देश दिए। एडीओ पंचायत की तहरीर पर पांचों के विरुद्ध मुकदमा ढेबरुआ थाने में दर्ज हुआ था।
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ग्राम पंचायतों में अनियमितता संबंधी जो भी शिकायतें मिल रही है, उनकी नियमानुसार निष्पक्ष जांच कराई जा रही है। जहां जांच में अनियमितता की पुष्टि हो रही है, वहां पर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। जहां शिकायत निराधार साबित होती है, वहां उसे बिना कार्रवाई निक्षेपित कर दी जाती है।
- बलराम सिंह, मुख्य विकास अधिकारी
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