डायरिया का कहर, 24 घंटे में दो मौतों से रेड़वरिया गांव
परसा। बढ़नी ब्लॉक के रेड़वरिया गांव में डायरिया का प्रकोप कम होता नहीं दिखाई दे रहा है। गांव में 24 घंटे में इस बीमारी दो लोगों की मौत हो गई है। अब तक रेड़वरिया में पांच लोगों की जान जा चुकी है। अब भी छह लोग बीमार हैं, जिनका सरकारी व निजी अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
अब तक रेड़वरिया गांव के लगभग 15 घरों के 20 लोग डायरिया से पीड़ित हो चुके हैं। इनमें छह लोगों का सरकारी या निजी अस्पतालों में इलाज चल रहा है। गांव के रहने वाले आवेश रजा (08 वर्ष) पुत्र शकील और बुशरा (04 वर्ष) पुत्री मो. फारुख की तबीयत खराब होने के बाद परिजनों ने उन्हें पीएचसी बढ़नी भर्ती कराया है। सीएमओ डॉ. संदीप चौधरी ने रविवार को गांव में दौरा कर लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की टीम को सतर्क रहने के निर्देश दिए।
इलाज के दौरान गई दो लोगों की जान
संयुक्त जिला चिकित्सालय में 24 घंटे इलाज के बाद डायरिया से पीड़ित रेड़वरिया के धर्मराज (55) की मौत हो गई। उनके पुत्र लवकुश ने बताया कि इमरजेंसी के डॉक्टरों ने उन्हें बीआरडी मेडिकल कॉलेज के रेफर कर दिया था। एंबुलेंस में बैठते ही धर्मराज ने अंतिम सांस ली। लवकुश ने बताया कि उनकी पत्नी मंजू की भी तबीयत खराब हुई थी। उन्होंने उनको निजी अस्पताल में भर्ती कराया है। वहीं शोहरतगढ़ में इलाज के बाद घर पहुंची नुसरत (9 माह) की मौत हो गई, जबकि उसकी मां समीमा की एक सितंबर को मौत हुई थी।
एक गांव में इतनी मौत
बढ़नी ब्लॉक के रेड़वरिया में 250 परिवार में 1574 आबादी है। 31 अगस्त से डायरिया ने अपना पांव रेड़वरिया गांव में पसारना शुरू किया। 31 अगस्त को रेड़वरिया में खैरुन्निशा (60 वर्ष) पत्नी मो. यासीन व रुक्साना (08 वर्ष) पुत्री अब्दुल अजीज की मौत हो गई। पहली सितंबर को शमीमा (45 वर्ष) पत्नी सरीफुल्लाह की भी मौत हो गई। उसके बाद तीन सितंबर की रात नुसरत (09 माह) पुत्री सरीफुल्लाह की डायरिया से मौत हो गई। चार सितंबर की रात 12 बजे धर्मराज (55 वर्ष) की डायरिया से मौत हो गई।
गांव में लगी है स्वास्थ्य विभाग की टीम
रेड़वरिया गांव में 31 अगस्त को डायरिया का कहर शुरू हुआ। उसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम को गांव में लगाया गया है। फिर भी मौतों का सिलसिला नहीं थमा है। गांव में एक दिन ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव हुआ है और क्लोरीन की गोलियां बांट दी गई हैं। कुछ लोगों को दवाइयां भी दी गईं हैं। गांव के अनवर अहमद ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम प्रतिदिन आती है, लेकिन एक घंटा में ही वापस चली जाती है। गांव में किसी की तबीयत खराब होने पर उन्हें बढ़नी, नौगढ़ या शोहरतगढ़ ले जाना पड़ रहा है। कोई हेल्पलाइन नहीं है कि किसी तबीयत खराब होने पर मदद मिल सके।