औराताल। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के कैथवलिया ग्राम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। कन्हैया लाल की जय-जयकार से पूरा पंडाल गूंज उठा। विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालु भाव विभोर होकर नाचने लगे। विक्रमा प्रसाद मिश्र ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 84 लाख योनियां भुगतने के बाद ही मानव देह प्राप्त होती है, इसलिए इस शरीर को व्यर्थ कामों में न लगाकर जनकल्याण और ईश्वर भक्ति में समर्पित करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रभु का अवतार अत्याचार को समाप्त करने और धर्म की स्थापना के लिए होता है। जब कंस ने अत्याचार की सभी मर्यादाएं तोड़ दीं, तब प्रभु श्री कृष्ण का जन्म हुआ। कथा में श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग आते ही श्रद्धालु हरे राधा-कृष्ण के उद्घोष के साथ भाव विभोर होकर नृत्य करने लगे। संवाद