सिद्धार्थनगर। डिजिटल की बढ़ती दखल ने रिश्तों की परिभाषा बदल दी है। आभासी दुनिया को देखकर युवा सही-गलत, अपने-पराये के भेद को भूलकर गलत राह पर कदम बढ़ा ले रहे हैं।
परिवार की मर्यादा और सामाजिक दायरे को पीछे छोड़ युवक-युवतियां गैरों पर भरोसा कर ऐसे कदम उठा रहे हैं, जिनका अंत या तो जेल की सलाखें या फिर जीवन की डोर टूटने तक पहुंच रहा है। जिले में इस तरह की वारदातों में तेजी से इजाफा हो रहा है जो कहीं न कहीं बेहद चिंताजनक है।
प्रेम प्रसंग या सामाजिक दबाव के कारण किशोरियों द्वारा आत्मघाती कदम उठाने के मामले भी बढ़े हैं। समाजशास्त्रियों का मानना है कि पारिवारिक संवाद की कमी और आभासी दुनिया पर बढ़ती निर्भरता युवाओं को भावनात्मक रूप से कमजोर बना रही है। डुमरियागंज और शिवनगर डिड़ई थाना क्षेत्र में दो ही मामले सामने आए, जिसमें गैर पर अपनों से अधिक भरोसा जताया। इन वारदातों में दो युवतियों ने जानदेकर इसकी कीमत चुकाई। एक मामले में तंग आकर युवती ने जहर निगल लिया तो वहीं, दूसरे ने प्रेमी के जेल जाने के बाद फंदे से लटक कर जान दे दी। इतना ही नहीं बेहद चिंता की बात है कि एक साल में 30 से अधिक युवतियाें ने दूसरे पर भरोसा करके न सिर्फ घर की दहलीज को लांघने की कोशिश की बल्कि देश छाेड़ने की कोशिश भी की। गनीमत यह रही कि सीमावर्ती थानों की पुलिस और एसएसबी की नजर पड़ी। संदिग्ध दिखने पर पूछताछ की और असलियत बाहर आई तो परिवार को बुलाकर उन्हें सुरक्षित सौंप दिया गया।
यह वह मामले हैं जिनमें सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस की सक्रियता से किशोरी और युवती शातिरों के चंगुल में आने से बच गईं। वहीं अधिकांश परिवार ऐसे भी हैं जो इज्जत की वजह से थाने तक नहीं पहुंचते हैं और सबकुछ जानने के बाद भी खामोश रह जाते हैं। वहीं जो मामले पुलिस तक पहुंचे हैं, उनमें कार्रवाई के बाद पुलिस ढूंढ़कर लाई है।
चौंकाने वाली बात यह भी है कि पकड़े जाने पर कोई साथ आए युवक को भाई बताता है तो कोई रिश्तेदार। कई मामलों में पश्चिमी यूपी के अलावा दूसरे राज्यों से भी युवक-युवतियां यहां पहुंचते पाए गए।
सीमा पार की कोशिश : सीमावर्ती क्षेत्र में बीते महीनों में 30 से अधिक मामले सामने आए, जिनमें युवतियां बिना वैध दस्तावेज सीमा पार करने की कोशिश में पकड़ी गई। पूछताछ में अधिकांश ने प्रेम संबंध या बेहतर जीवन का झांसा मिलने की बात कही। कुछ ने साथ आए युवक को भाई या रिश्तेदार बताया, लेकिन जांच में सच्चाई अलग निकली। पुलिस और एसएसबी की सतर्कता से उन्हें शिकार होने से बचाया जा सका।