सिद्धार्थनगर। कट्टर हिंदूवादी छवि वाले भाजपा के फायर ब्रांड नेता डुमरियागंज के पूर्व विधायक प्रेमप्रकाश उर्फ जिप्पी तिवारी बेटे की मौत से टूट गए। आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। वैभव उनका इकलौता बेटा ही नहीं, बल्कि राजनीतिक विरासत का एकमात्र वारिस भी था। युवा ग्राम प्रधान वैभव की हत्या के बाद परिवार के सियासी भविष्य को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
प्रेमप्रकाश उर्फ जिप्पी तिवारी डुमरियागंज विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 1991, 1993 व 96 में लगातार तीन बार विधायक चुने गए थे। भाजपा में उनकी गहरी पैठ है। हालांकि वर्ष 2002, 2007 और 2010 में चुनाव हारने के बाद उनकी राजनीतिक सक्रियता थोड़ी कम हो गई थी। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय के साथ कुछ साल सपा में बिताने के बाद विधानसभा चुनाव से पहले जिप्पी तिवारी ने भाजपा में जोरदार वापसी की थी। ब्राह्मण नेता के रूप में चर्चित जिप्पी अब अपनी राजनीतिक विरासत अगली पीढ़ी में बेटे वैभव उर्फ छोटू तिवारी को सौंपने की तैयारी में थे।
ग्राम प्रधान चुने जाने के बाद राजनीति में वैभव की बढ़ती सक्रियता से लोगों को नई संभावनाएं दिखने भी लगी थीं। भनवापुर की ब्लॉक प्रमुख रीना चौधरी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के लिए बीडीसी सदस्यों की गोलबंदी में वैभव की अहम भूमिका रही। उपचुनाव में वैभव अपनी मां व बीडीसी सदस्य संध्या तिवारी को प्रमुख बनाने के लिए पूरे दमखम से जुटे थे। माना जा रहा था कि अगर मां संध्या ब्लाक प्रमुख चुनी गईं तो कमान वैभव के हाथों में ही होगी और यहीं से उनकी सियासी पारी नई ऊंचाई हासिल करेगी। पिता भी बेटे के राजनीतिक भविष्य को लेकर आश्वस्त थे। इससे पहले की उम्मीदें परवान चढ़तीं, नियति के हाथों पिता जिप्पी तिवारी का वैभव ही छिन गया। इकलौते बेटे की मौत से पूर्व विधायक जिप्पी तिवारी की राजनीतिक वारिस को लेकर उनके करीबियों की चिंता बढ़ गई है।