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-पूर्व प्रधान बलराम के निधन पर उसका बाजार हुआ बंद

Sat, 29 Sep 2018 10:12 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
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बलराम बरनवाल (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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उसका बाजार। उसका बाजार के रेहरा गांव के पूर्व प्रधान रहे बलराम बरनवाल (56) की मौत की खबर से बाजार समेत अगल-बगल के गांव के लोग स्तब्ध हैं। किसी को विश्वास नहीं हो रहा है कि कल तक लोगों से हंसी खुशी के माहौल में मिलने वाले बलराम अब उनके बीच नहीं रहे। शनिवार की सुबह जैसे ही उनकी मौत की सूचना आई, लोग दुकानें बंद कर उनके घर के लिए निकल गए। देर शाम शव के गांव पहुंचते ही बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। सूचना पर सदर विधायक श्यामधनी राही भी मौके पर मौजूद थे।
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शुक्रवार को लखनऊ से अपनी गाड़ी बनवाकर घर लौटते समय उनकी गाड़ी अनियंत्रित होकर बस्ती के कठिनहियां नाले में चली गई। गाड़ी उनका ड्राइवर आद्या प्रसाद नगर निवासी शमशाद चला रहा था। 16 वर्ष की उम्र में ही बलराम बरनवाल के कंधों पर घर चलाने का बोझ पड़ गया। उनके पिता रामबरन बरनवाल की असामयिक निधन के बाद उन्होंने व्यवसाय शुरू किया और आगे बढ़ते चले गए। उन्होंने अपनी बहन की शादी धूमधाम से की। फिर इनकी शादी बच्ची देवी से हुई। इनसे छ: बच्चे हैं, इसमें दो लड़कियां और चार लड़के हैं। सभी बेटियों समेत एक बेटे की शादी हो गई है।
रह चुके है ग्राम प्रधान
बलराम बरनवाल राजनीतिक रूप से भी काफी मजबूत थे। 1995 से 2009 तक वह रेहरा ग्राम पंचायत के प्रधान रहे। वर्तमान नगर पंचायत जो पहले ग्राम पंचायत हुआ करता था, वहां के आत्माराम जायसवाल जैसे दिग्गज नेता के विपरीत पत्नी बच्ची देवी को चुनाव लड़ाया और शिकस्त देकर लोगों को चौंका दिया। इनके मिलनसार स्वभाव और व्यवहार कुशलता के कारण लोग इनसे जुड़े रहते थे। 2012 के नगर पंचायत के अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में वह मात्र 118 मतों से चुनाव हार गए, इन्हें कुल 1608 मत मिले थे। 2017 के चुनाव में भी वह फिर अपनी पत्नी को चुनाव मैदान में उतारा इन्हें 2417 मत मिला।
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परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
बलराम छ: बच्चों के पिता थे। उनकी दो लड़कियां और चार लड़के हैं, लड़कियों की शादी हो चुकी है। विजयलक्ष्मी उनकी पहली संतान है, अजय बरनवाल उनका बड़ा बेटा है, इसकी भी शादी हो चुकी है। तीसरे पर विजय, उर्मिला, राहुल और रोहित हैं। बलराम की मौत के साथ ही उनके ड्राइवर शमशाद (40) की मौत की खबर से लोगों में शोक है। दो घरों में एक साथ हो रहे मातम से लोग काफी मर्माहत हैं। इसके भी छ: बच्चे हैं, इनमें चार लड़कियां और दो लड़के हैं। शमशाद अपने परिवार का एकमात्र सहारा था वह भी बलराम की तरह व्यवहार कुशल था। शमशाद के न रहने से उसके परिवार के सम्मुख बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
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