सिद्धार्थनगर। छेड़छाड़ के मामले में बेटी को न्याय दिलाने के लिए सोमवार को होमगार्ड परिवार संग कलेक्ट्रेट में धरने पर बैठ गया। उसका आरोप है कि मैंने मामले में समझौता नहीं किया तो मेरी ड्यूटी से रोक दिया गया। पीड़ित इटवा क्षेत्र के एक गांव का निवासी है।
पीड़ित ने डीएम की अनुपस्थिति में सीडीओ को ज्ञापन दिया। इसमें उसने आरोप लगाया है कि एक से 31 अगस्त से उसकी ड्यूटी भवानीगंज थाने में थी। बेटी से छेड़छाड़ का मामला आने के बाद उसे 24 अगस्त को ड्यूटी से रोक दिया गया। पूछने पर पता चला कि बस्ती जाओ, वहां अधिकारी के पास जांच है। वहां जाने पर कहा गया जांच के बाद ही ड्यूटी मिलेगी।
उसका आरोप है कि 19 जून को बेटी के साथ गांव के युवक ने छेड़खानी की थी। विरोध पर आरोपी ने पत्नी व छोटी बेटी को पीटकर घायल कर दिया। उच्चधिकारियों के आदेश के बाद 22 अगस्त को इटवा पुलिस ने छेड़खानी का केस दर्ज किया। 23 सितंबर को सीजेएम के यहां बेटी का बयान हुआ। इसी दिन घर पर प्रधान आए और कहा कि एसपी साहब ने बुलाया है। पहुंचने पर बेटी से बयान बदलाने के लिए कहा गया। यह सुनकर साहब और नेताजी नाराज हो गए। इसके बाद 24 अगस्त से ड्यूटी रोक दी गई। मैं ड्यूटी नहीं करूंगा तो परिवार कैसे चलेगा। इसी बीच कलेक्ट्रेट पहुंचे सदर विधायक से भी पीड़ितों ने अपनी पीड़ा बताई। उन्होंने न्याय का आश्वासन दिया। एसपी डॉ. धर्मबीर सिंह ने बताया कि मेरी होमगार्ड से कभी भी मुलाकात नहीं हुई है। सभी आरोप बेबुनियाद हैं।
वहीं होमगार्ड कमांडेंट रमेश कुुमार ने कहा कि डुमरियागंज पुलिस की रिपोर्ट पर कार्रवाई की गई है। होमगार्ड के खिलाफ केस दर्ज है। जिसमें वह हाईकोर्ट से जमानत पर है।
होमगार्ड के घरवाले बोले, अब तक नहीं याद नहीं आया था केस
होमगार्ड के परिजनों का कहना है कि मानसिक रूप से कमजोर करने और दबाव डालने के लिए सारी साजिश रची गई है। इससे पूर्व अब तक केस की याद किसी को भी नहीं आई। वे 1995 से ही ड्यूटी कर रहे है। हर तीन साल पर चरित्र प्रमाण पत्र की जांच भी होती है। इस दौरान कभी भी केस का जिक्र नहीं हुआ। अचानक जब क्षेत्र के नेता का दबाव पड़ा तो विभाग को को केस याद आ गया।
इच्छा मृत्यु की मांग के बाद दर्ज हुआ था केस
होमगार्ड के अनुसार, छेड़खानी की घटना के मामले में जब दो माह से अधिक समय बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई तो बेटी ने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को पत्र भेजकर इच्छा मृत्यु की मांग की थी। इसके बाद प्रशासन जागा और केस दर्ज हुआ। इसके बाद मुझे ड्यूटी से रोक दिया गया।