संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। खेत और ईंट भट्ठा व अन्य निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाले वाहन सड़कों-हाईवे पर दौड़ रहे हैं, जिससे हादसों का जोखिम बढ़ गया है। आगे-पीछे से सटीक न दिखने और बेकाबू रफ्तार होने से यह वाहन जानलेवा साबित हो रहे हैं।
तीन दिन में सड़क हादसों में पांच लोगों की जान गई। इसमें दो मामलों में तीन मौतें के जेसीबी और डंपर से हुई हैं। संभागीय परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक दो माह में नियम तोड़ने वाले और बिना नंबर प्लेट 145 बड़े वाहनों पर कार्रवाई की गई। इनमें सबसे अधिक 35 डंपर है।
प्रशासन और खनन विभाग की अनदेखी से कहीं न कहीं हादसों का जोखिम बढ़ गया है। रात और दिन में दौड़ने वाले इन वाहनों की जांच असल जिम्मेदारी दोनों विभाग की है।
जिले में खनन सीजन शुरू होते ही डंपर, ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य भारी वाहनों की संख्या सड़कों पर बढ़ जाती है। दिन और रात दोनों समय इन वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई चालक तेज रफ्तार, लापरवाही और यातायात नियमों की अनदेखी करते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी रहती है। खासकर ग्रामीण और संपर्क मार्गों पर बाइक सवारों और पैदल चलने वालों को सबसे अधिक खतरा रहता है। प्रशासन और परिवहन विभाग समय-समय पर अभियान चलाकर वाहनों की जांच और चालान की कार्रवाई का दावा करते हैं लेकिन हादसों की बढ़ती संख्या यह संकेत दे रही है कि कार्रवाई का असर जमीनी स्तर पर अपेक्षित रूप से नहीं दिख रहा है।
जिले में पिछले तीन दिन में हुए हादसे में खनन से जुड़े वाहन जेसीबी, डंपर और ट्रैक्टर-ट्रॉली से हादसे होने की बात सामने आई है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि यह इनकी जांच में अनदेखी की जा रही है। अगर जांच की जाती तो यह बेलगाम होकर दौड़ न लगाते और न ही हादसों में सामने वाली की जान ही जाती।
इस संबंध में एआरटीओ संजय सिंह ने बताया कि डंपर और बड़े चार पहिया वाहनों की लगातार जांच की जा रही है। अप्रैल और मई माह में कुल 145 वाहनों पर कार्रवाई की गई है जो बिना नंबर क संचालित हो रहे हैं। आगे भी जांच अभियान और कार्रवाई जारी रहेगी।
दो माह में 145 वाहनों का चालान : संभागीय परिवहन विभाग की ओर से अप्रैल और मई माह में ट्रक, बस ट्रेलर, जेसीबी, डंपर और ट्रैक्टर- ट्रॉली की परमिट और कागजात व नंबरों की जांच के लिए विशेष अभियान चलाया गया। विभाग से मिले रिकाॅर्ड के अनुसार, कुल 145 वाहन पकड़े गए। इनमें नंबर प्लेट नहीं थी या और वे कागजात भी नहीं दिखा सके थे। उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।