सिद्धार्थनगर। बढ़नी ब्लॉक के तुलसियापुर क्षेत्र के मधवापुर में निर्माणाधीन मछली मंडी में गेट हादसे के बाद एक बार फिर निर्माण कार्य ने रफ्तार पकड़ ली है। क्षेत्र के मत्स्य पालकों के लिए महत्वपूर्ण इस मछली मंडी के निर्माण की समयसीमा सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। वहीं, बारिश के मौसम को देखते हुए कार्यदायी संस्था ने निर्माण कार्य पूरा करने के लिए दिसंबर 2026 तक का समय मांगा है। मंडी परिषद की ओर से 3.87 करोड़ रुपये से इस परियोजना का निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण कार्य और गुणवत्ता की निगरानी की जा रही है।
मधवापुर मछली मंडी में छह मीटर चौड़े और 16 मीटर लंबे दो छायादार नीलामी चबूतरों के साथ कार्यालय भवन बनाया जा रहा है। इसके अलावा सेफ्टी टैंक, सोकपिट, 16 श्रेणी-‘स’ दुकानें, आंतरिक मार्ग, केसी ड्रेन, आरसीसी ड्रेन, बाहरी नाला, आठ क्रॉसिंग कल्वर्ट और तीन वाटर स्टैंड पोस्ट का निर्माण भी प्रस्तावित है। परिसर में कैंटीन, बैंक, सिक्योरिटी कार्यालय, स्टाफ रूम तथा पांच खुले चबूतरे भी बनाए जाएंगे।
तीन जून को शटरिंग गिरने से हो गई थी मजदूर की मौत
कार्यदायी संस्था की ओर से मिट्टी भराई, इंटरलॉकिंग, बाउंड्रीवाल और गेट का निर्माण कराया जा रहा है। इसी दौरान तीन जून 2026 को गेट की शटरिंग गिरने से एक मजदूर की मलबे में दबकर मौत हो गई थी, जबकि छह अन्य घायल हो गए थे। घटना के बाद जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। लापरवाही मिलने पर मंडी परिषद के सहायक अभियंता की तहरीर पर ठेकेदार फर्म के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। वर्तमान में निर्माण कार्य दोबारा तेजी से कराया जा रहा है। मंडी परिषद के अनुसार अब तक 50 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा हो चुका है।
यह था पूरा मामला
तुलसियापुर। निर्माणाधीन मछली मंडी के मुख्य गेट की शटरिंग भरभराकर गिरने से एक मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि छह मजदूर घायल हो गए थे। घटना के बाद मंडी परिषद के सहायक अभियंता की तहरीर पर निर्माण कार्य करा रही ठेकेदार फर्म आर्यन कंस्ट्रक्शन की प्रोपराइटर संगीता सिंह के खिलाफ ढेबरुआ थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन की ओर से गठित जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर मंडी परिषद (निर्माण) बस्ती के अवर अभियंता, सहायक अभियंता और उपनिदेशक के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी गई है। साथ ही संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की भी सिफारिश की गई है। ढेबरुआ थाना प्रभारी दुर्गा प्रसाद ने बताया कि मामले की विवेचना जारी है।
जांच में सामने आई थीं गंभीर लापरवाहियां
जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार करीब 20 फीट ऊंचे और 18 फीट चौड़े गेट की शटरिंग को सहारा देने के लिए लोहे के पाइप के बजाय बांस का उपयोग किया गया था। जिस मिट्टी पर पूरा ढांचा खड़ा किया गया था, उसकी भराई भी पर्याप्त रूप से कंपैक्ट नहीं थी। मिट्टी धंसने से बांस टेढ़े हो गए और पूरी शटरिंग मजदूरों पर गिर गई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि निर्माणाधीन गेट से महज दो फीट की दूरी पर हाईटेंशन बिजली लाइन गुजर रही थी, जो भविष्य में भी बड़ा खतरा बन सकती है। जांच समिति ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और पर्यवेक्षण में गंभीर शिथिलता की बात कही थी। इसके बाद विभाग ने निर्माण कार्य की निगरानी और सख्त कर दी है।
गुणवत्ता पर जोर, मत्स्य पालकों को मिलेगा बड़ा बाजार
हादसे के बाद विभाग निर्माण कार्य की नियमित निगरानी करा रहा है। साथ ही दूसरी एजेंसी से थर्ड पार्टी निरीक्षण भी कराया जा रहा है, ताकि निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा हो सके। किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। मछली मंडी बनने से आसपास के 50 से अधिक गांवों के मत्स्य पालकों को लाभ मिलेगा। बढ़नी ब्लॉक में बड़े पैमाने पर मत्स्य पालन होता है। मंडी शुरू होने के बाद मत्स्य पालकों को स्थानीय स्तर पर बड़ा बाजार मिलेगा, जहां उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।
मधवापुर मछली मंडी के निर्माण कार्य को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा कराने के लिए विभाग लगातार निगरानी कर रहा है। साथ ही दूसरी एजेंसी से थर्ड पार्टी जांच भी कराई जा रही है। निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
- अमन कुमार जायसवाल, उपनिदेशक (निर्माण), मंडी परिषद, बस्ती