सिद्धार्थनगर। शहर से कस्बों तक बेसमेंट में होटल, लाइब्रेरी और कपड़े की दुकानें बिना रोक-टोक संचालित हो रही हैं। अधिकतर जगहों पर न तो अग्निशमन के इंतजाम हैं और न ही आपात स्थिति में बाहर निकलने के लिए अतिरिक्त दरवाजे। ऐसे में अचानक कोई हादसा होता है तो बड़ी जनहानि से इन्कार नहीं किया जा सकता।
बांसी में बेसमेंट में संचालित कैफे में शनिवार को लगी आग बुझाने में कोतवाल समेत सात लोग झुलस गए। इसके बाद प्रशासन ने बेसमेंट में संचालित दुकानों आदि में सुरक्षा के इंतजाम के मद्देनजर जांच के लिए डीएम ने निर्देश दिए हैं।
रविवार को बेसमेंट में दुकानों के संचालन की पड़ताल की गई तो अधिकतर जगहों पर सुरक्षा के इंतजाम नहीं दिखे। कई जगह तो ऐसी स्थिति दिखी कि अगर आग लगी तो कोई बाहर नहीं निकल पाएगा। वहीं आग बुझाने के लिए फायर सर्विस भी नहीं पहुंच पाएगा।
अगर घटना से सबक नहीं लिया गया तो जिले में अन्य घटनाएं होने से इन्कार नहीं किया जा सकता है। हालांकि बांसी की घटना के बाद जिलाधिकारी ने इसके मानक की जांच के निर्देश दिए हैं।
बांसी की घटना के बाद जब नगर के बेसमेंट की पड़ताल की गई तो सामने आया कि बांसी तिराहा के पास एक जगह बेसमेंट में शैक्षिक संस्थान का संचालित हो रहा था। यहां पर बड़ी संख्या में नियमित बच्चे आते हैं। यहां आग बुझाने के लिए सिलिंडर तो हैं लेकिन आपात स्थिति में बाहर निकलने के लिए कोई अतिरिक्त रास्ता नहीं है। कंप्यूटर पर काम होता है, ऐसे में शार्ट-सर्किट से अगर आग लगी तो समस्या हो सकती है। नीचे होने के कारण अंधेरा छा जाएगा, ऐसे में बाहर निकलने में दिक्कत होगी। दमकल को भी आग बुझाने में परेशानी होगी।
नगर के एक बेसमेंट में होटल भी संचालित होता मिला। यहां भोजन बनाने के लिए सिलिंडर का प्रयोग होता है। बेसमेंट के ऊपर दुकानें हैं और परिवार भी रहता है। यहां आग बुझाने के लिए इस्तेमाल होने वाला सिलिंडर तक नहीं है। इसके साथ तिराहे पर बेसमेंट में कपड़े की दुकान चलती है। इसी तरह स्टेशन रोड पर मेडिकल स्टोर और उसका रोड पर होटल का संचालन पाया गया। जहां आग लगने पर बड़ा नुकसान होगा।