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104 गांवों में नहीं है सामुदायिक शौचालय

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104 गांवों में नहीं है सामुदायिक शौचालय
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कहीं विवाद तो कहीं जमीन न होने के कारण दो साल बाद भी नहीं बन पा रहा शौचालय
जिन घरों में व्यक्तिगत शौचालय नहीं थे उनकी सहूलियत के लिए बनाया जा रहा
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले को खुले में शौचमुक्त घोषित कर दिया गया है। व्यक्तिगत के साथ ही, शौचालयविहीन परिजनों की सहूलियत के लिए सामुदायिक शौचालय बनाने की कवायद शुरू हुई। योजना शुरू हुए दो वर्ष से अधिक का वक्त गुजर चुका है। जिले में 104 ऐसे गांव हैं जो सामुदायिक शौचालय विहीन हैं और बनने की उम्मीद भी कम हैं। कारण कहीं विवाद निर्माण में रोड़ा है तो कहीं जमीन ही नहीं है। ऐसे में शौचालय का निर्माण लटक गया है।
जलजनित बीमारियों को मात देने और गांव व कस्बे को खुले में शौचमुक्त बनाने के लिए स्वच्छ भारत अभियान शुरू हुआ। सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि देकर लोगों को व्यक्तिगत शौचालय बनाने के लिए प्रेरित किया गया। नतीजतन, जनपद खुले में शौचमुक्त घोषित कर दिया गया। मगर इसमें भी ऐसे परिवार थे, जिनके पास जमीन का अभाव था और वह व्यक्तिगत शौचालय नहीं बनवा सके। वे खुले में शौच के लिए जाने को मजबूर थे। ऐसे में उनकी सहूलियत के लिए हर ग्राम पंचायत में सरकारी भूमि पर सामुदायिक शौचालय का निर्माण कार्य शुरू हुआ। मगर योजना के शुरू हुए दो वर्ष से अधिक का वक्त बीत गया, लेकिन अधिकतर ग्राम पंचायतों में शौचालय बन नहीं पाए। वहीं, जिले की 104 ऐसी ग्राम पंचायतें चिह्नित हैं, जहां सामुदायिक शौचालय बनने की उम्मीद ही नहीं है। कारण कहीं निर्माण कार्य के लिए जमीन नहीं मिल रही है तो कहीं विवाद के कारण निर्माण शुरू होने के बाद ही रुक गया है। ऐसे में इन गांव में शौचालयविहीन परिवारों को खुले में जाना मजबूूरी बन गई है। इस संबंध में डीपीआरओ आदर्श ने बताया कि जमीन न मिलने के कारण सामुदायिक शौचालय नहीं बन पा रहे हैं। प्रयास जारी है, जहां जमीन मिलेगी, निर्माण कराया जाएगा।
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जिले में हैं इतनी ग्राम पंचायतें
जिले में 1136 ग्राम पंचायतें हैं और मौजूदा समय में 28 लाख से अधिक आबादी है। जिला ओडीएफ घोषित हो गया है। आंकड़ों के मुताबिक 966 गांव में सामुदायिक शौचालय बन चुके हैं। 126 गांवों में निमार्णाधीन है और 104 में जमीन और विवाद के कारण नहीं बन पा रहा है।
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