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Siddharthnagar News: सस्ती दवा और जांच का दावा जिंदगी पर पड़ रहा भारी

Wed, 10 Jun 2026 11:32 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। सस्ती दवा और कम पैसों में गुणवत्तापूर्ण जांच का दावा मरीजों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। शोहरतगढ़ में मेडिकल स्टोर से एक्सपायर्ड दवा बिकने के मामले सामने आए तो वहीं, गलत जांच रिपोर्ट के आधार पर इलाज से मरीज की जान तक चली गई। अधिकांश स्थानों पर कमीशन के खेल में लो क्वालिटी और जेनरिक दवा तो कहीं अप्रशिक्षित हाथों में लैब की रिपोर्ट है। जिले में हाल के दिनों में गलत पैथोलॉजी रिपोर्ट और एक्सपायर्ड दवा के मामलों ने जांच और निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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बीमारी का सही इलाज जांच और सही दवा पर निर्भर करता है। डॉक्टर दवा से पहले पूरी जांच करवाते हैं, जिससे समस्या की असल वजह सामने आ जाए और फिर उसी हिसाब से दवा शुरू हो सके लेकिन रिपोर्ट ही गलत हो जाए तो ऐसे में समस्या बढ़ सकती है। जनपद में कुछ ऐसा ही हो रहा है। तेजी से पैथालॉजी और मेडिकल स्टोर खुल रहे हैं, जहां बैठने वालों को न तो जांच का अनुभव है और न ही चिकित्सक की पर्ची पर लिखी दवा के फार्मूला या उत्पादन और एक्सपायर तिथि की। जिले में कई ऐसे पैथोलॉजी केंद्र संचालित हैं, जहां प्रशिक्षित तकनीशियन और विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी के बिना जांच की जा रही है। कम लागत और अधिक कमाई के चक्कर में कई जगहों पर मानकों की अनदेखी हो रही है।
नाम न छापने की शर्त पर माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के दो चिकित्सकों ने बताया कि कई दिन तक बाहर इलाज कराने और रिपोर्ट लेकर पहुंचने वाले कई मरीजों की मेडिकल कॉलेज में जांच के बाद रिपोर्ट में काफी अंतर मिला है। ऐसे मामले सामने आते रहते हैं। कई बार ऐसा भी हुआ है कि दवा कुछ और बताई गई। जब मरीज लेकर पहुंचा तो मेडिकल स्टोर संचालक ने कुछ और दे दी। इन्हें वापस कराकर सही दवा मंगवाई जाती है, वरना मरीज को नुकसान हो सकता है। यह उन दवाओं में होता है जो दवाएं उपलब्ध नहीं होती हैं और मरीजों को देना जरूरी होता है। काफी समय से ऐसा अंतर मिलने के बाद पहले से जांच कराकर रिपोर्ट लेकर आने वालों की दोबारा जांच कराने के बाद ही दवा शुरू की जाती है।
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बिना मानक पूरा किए चल रहे कई जांच लैब

जिले में करीब एक हजार से अधिक मेडिकल स्टोर संचालित हो रहे हैं। जो लीगल रूप से पंजीकृत भी हैं लेकिन, असलियत यह है कि इनमें लाइसेंस लेते समय डिग्री तो प्रशिक्षित की लगती है लेकिन काउंटर पर बैठने वाला व्यक्ति कोई और रहता है। वह सिर्फ डॉक्टरों का पर्चा देखकर दवा देते-देते खुद डॉक्टर बन बैठता है। जाने-अनजाने में इनकी दवा से लगातार हानि भी होती है, लेकिन न जाने के कारण मामला सामने नहीं आता है। यही हाल अल्ट्रासाउंड सेंटर और जांच लैब की भी है। मेडिकल कॉलेज और अन्य सरकारी अस्पतालों के लिए रेडियोलॉजिस्ट की कमी के कारण अलटरनेट ड्यूटी लगती है जबकि, शहर से देहात तक 60 से अधिक अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित हो रहे हैं। कमोबेश इतनी ही संख्या में जांच लैब भी संचालित हो रहा है। अब उम्मीद कर सकते हैं कि विशेषज्ञों की कमी है तो यहां जांच के लिए बैठा व्यक्ति कितना जानकार होगा। कारण इन्हीं की लापरवाही से लोटन जैसी घटना होती है।
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बोले विशेषज्ञ
इलाज जांच में का हिस्सा है। इसका सही होना बेहद जरूरी है, क्योंकि पूरा इलाज उसी रिपोर्ट पर निर्भर होता है, इसलिए डॉक्टर के परामर्श पर जांच कराएं और जांच करने वाले के बारे में जानकारी जरूर लें। इसके बाद ही जांच करवाएं। इसके साथ ही बिना डॉक्टर के सलाह के कोई दवा न लें। अगर लेते हैं जो उसके बारे में जानकारी जरूर करें। उत्पादन और एक्सपायर तिथि देख लें। कई बार दवा कुछ लिखी जाती है और दे कुछ और दिया जाता है। ऐसे मरीज की हालत बिगड़ जाती है। लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
डॉ. एमपी कसौधन, सेवानिवृत्त सीएमओ
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केस - 1
गलत रिपोर्ट बनी जानलेवा

एक मरीज की पैथोलॉजी रिपोर्ट में त्रुटि होने के बाद उसी आधार पर इलाज शुरू किया गया। हालत बिगड़ती गई और बाद में दूसरी जांच में रिपोर्ट गलत निकली। तब तक मरीज की जान जा चुकी थी। डॉक्टर ने बताया कि गलत रिपोर्ट पर शुरू हुए इलाज की वजह से जान गई है। इसके बाद पीड़ित ने शिकायत दर्ज कराई। टीम ने जांच में गड़बड़ी पाया और लोटन कस्बे के पैथालॉजी सेंटर को सील कर दिया। इसके पहले जांच में कई लैब और अल्ट्रासाउंड मानक के अनुरूप नहीं मिलने पर सील किए जा चुके हैं।
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एक्सपायर दवा की बिक्री

शोहरतगढ़ सीएचसी के बगल एक मेडिकल स्टोर से दो महीने में दो बार एक्सपायर दवा की बिक्री हुई है। इस मेडिकल स्टोर ने 28 अप्रैल को एक्सपायर सिरप दिया था। सात महीने की मासूम बच्ची को पिलाने के बाद उसकी हालत बिगड़ गई थी। तत्काल सीएचसी पहुंचाने के बाद बच्चे की हालत सुधार हुआ था। 29 अप्रैल को मामले को लेकर पीड़ित हंगामा किया था, जिसकी जांच फाइलों में दब कर रह गई है। उसके बाद बीते सोमवार को गैस की दवा लेने गए एक व्यक्ति को संचालक ने एक्सपायर दवा दे दी। व्यक्ति को इसकी जानकारी होने बाद मेडिकल स्टोर पर हंगामा हुआ था, जिसका वीडियो वायरल हो रहा था। इसके पहले ड्रग विभाग की टीम कई बार दवाओं में कई स्थानों पर गड़बड़ी पकड़ चुकी है।
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बोले जिम्मेदार
जैसे ही जांच केंद्र या फिर अस्पताल में गड़बड़ी की कोई शिकायती मिलती है, टीम गठित करके जांच कराई जाती है। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाती है। लोटन कस्बे के मामले में शिकायत आई थी। जांच कराने के बाद सील किया गया है, आगे की जांच की जा रही है।
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डॉ. आरके चौरसिया, सीएमओ
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