संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। स्वस्थ शरीर और पेट की बीमारियों से बचने के लिए शुद्ध पानी पीने की चिकित्सक सलाह देते हैं। उनका मानना है कि पेट से जुड़ी अधिकतर बीमारियों की जड़ पानी है। ऐसे में खाद्य वस्तुओं के साथ-साथ शुद्ध पानी बीमारी से बचने के लिए जरूरी है। इससे बचने के लिए लोग बोतल और जार के पानी का प्रयोग कर रहे हैं। यह मानकर कि यह शुद्ध है।
अगर ऐसा सोच रहे हैं, तो आप गलत हैं। क्योंकि पानी के धंधे में स्वच्छता से तौबा कर चुके हैं। दूषित जार और काई जमे 500-1000 लीटर के टैंकर से शहर से गांव तक पानी आपूर्ति किया जा रहा है। जलदोहन के साथ-साथ सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। शहर से गांव तक पूरे जनपद में 200 से अधिक आरओ प्लांट चल रहे हैं।
प्रतिदिन लाखों लीटर पानी बिक जा रहा है। मकड़जाल की तरह फैले इस धंधे पर लगाम लगाने वाला कोई नहीं है। कारण न तो लाइसेंस की जांच होती है और न ही पानी की गुणवत्ता की, जबकि जिले के कुछ इलाके ऐसे हैं जहां के पानी में आयरन की मात्रा जरूरत से अधिक मिलने की पूर्व में हुई जांच में पुष्टि हो चुकी है।
ऐसे में चिकित्सकों की सलाह है कि अगर जार वाला पानी ले रहे हैं, तो उसे उबाल कर ठंड कर लें फिर पीएं। क्योंकि प्लांट से निकलने वाली पानी गंदगी की बात अलग है। फिल्टर में कई तत्व समाप्त हो जा रहे हैं, जो सेहत के लिए और नुकसानदेह है।
सहालग में करोड़ों का कारोबार, सेहत से खिलवाड़ : मौजूदा समय में लगन शुरू है। होटल और मैरिज हाल में पानी की मांग होती है। ऐसे में आरओ प्लांट वाले की सेटिंग हो जाती है। पूरे लगन बरात की क्षमता के अनुसार पानी पहुंचाया जाता है। केवल सहालग के दौरान शुद्ध पानी के आरओ प्लांट का कारोबार करीब 10 करोड़ है, लेकिन लोगों को पानी कितना शुद्ध मिला है, इसकी गारंटी नहीं है। आश्चर्य की बात तो यह है कि इसका सुध लेने वाला भी कोई नहीं है। इसका असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। जिले में 200 से अधिक आरओ प्लांट चल रहे हैं। आरओ पानी के नाम पर चल रहे करोड़ों रुपये का यह कारोबार सहालग में और भी बढ़ जाता है।