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Siddharthnagar News: स्क्रीन पर कैद हुआ बचपन, खेल के मैदान छूटे

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घर पर पढ़ाई करते बच्चे।  
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घरों तक सिमटे बच्चे, मोबाइल-टीवी बना सबसे बड़ा सहारा
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विशेषज्ञों की सलाह-छुट्टियों में पढ़ाई के साथ खेल और रचनात्मक गतिविधियां भी जरूरी
सिद्धार्थनगर। गर्मी की छुट्टियां शुरू होते ही जिले में बच्चों की दिनचर्या पूरी तरह बदल गई है। पहले जहां छुट्टियों में बच्चे सुबह-शाम मैदानों में क्रिकेट, फुटबॉल, कबड्डी और अन्य खेल खेलते नजर आते थे, वहीं अब अधिकांश बच्चे घरों तक सीमित हो गए हैं।
तेज गर्मी, अभिभावकों की सुरक्षा चिंता और मोबाइल की बढ़ती लत ने बच्चों का समय स्क्रीन तक समेट दिया है। इसका असर पढ़ाई, शारीरिक गतिविधियों और मानसिक विकास पर भी दिखाई देने लगा है।
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शहर और कस्बों के कई मैदान इन दिनों दोपहर ही नहीं, शाम के समय भी सूने नजर आ रहे हैं। पुस्तकालयों और कोचिंग केंद्रों में भी छुट्टियों के दौरान अपेक्षित संख्या में बच्चे नहीं पहुंच रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि बाहर गर्मी अधिक होने के कारण बच्चों को घर में रखना मजबूरी बन गई है, लेकिन घर में रहते हुए बच्चे घंटों मोबाइल, टीवी और ऑनलाइन गेम में समय बिता रहे हैं।
इटवा निवासी सीमा श्रीवास्तव बताती हैं कि छुट्टियों में बच्चों को व्यस्त रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। कुछ समय पढ़ाई कराने के बाद बच्चे मोबाइल मांगने लगते हैं। वहीं बांसी के अभिभावक मोहम्मद आरिफ का कहना है कि पहले मोहल्लों में बच्चे सामूहिक खेल खेलते थे, लेकिन अब अधिकतर बच्चे अकेले मोबाइल पर गेम खेलना पसंद कर रहे हैं।
शिक्षकों का मानना है कि लगातार स्क्रीन देखने से बच्चों की पढ़ाई की आदत कमजोर हो रही है। कई बच्चों में किताब पढ़ने की रुचि कम हुई है। शिक्षकों का कहना है कि छुट्टियों में रोज थोड़ा अध्ययन जरूरी है, ताकि नए सत्र में बच्चों को पढ़ाई पकड़ने में कठिनाई न हो।
बाल रोग विशेषज्ञों और मनोवैज्ञानिकों का भी कहना है कि लंबे समय तक मोबाइल और टीवी देखने से बच्चों की आंखों और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार छुट्टियों में बच्चों को खेल, चित्रकला, कहानी पढ़ने, लेखन और अन्य रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना जरूरी है। इससे बच्चों का मानसिक विकास बेहतर होता है और उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
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नौगढ़ के दीपक श्रीवास्तव, अतुल कसौधन सहित कई अभिभावक कहते हैं कि अब बच्चों के लिए घर के भीतर ही नई गतिविधियां शुरू कराने की कोशिश कर रहे हैं। कोई बच्चों को कहानी की किताबें दिला रहा है तो कोई ड्राइंग, संगीत या हस्तकला सीखने के लिए प्रेरित कर रहा है। कुछ परिवार शाम के समय बच्चों को पार्क और स्टेडियम भी ले जा रहे हैं ताकि उनका स्क्रीन टाइम कम हो सके।

बच्चों की दिनचर्या बिगड़ने से बढ़ रही परेशानी
- देर रात तक मोबाइल चलाने से नींद प्रभावित
- सुबह देर से उठने पर पढ़ाई की आदत कमजोर
- शारीरिक गतिविधियां कम होने से स्वास्थ्य पर असर
- आंखों में जलन और सिरदर्द की शिकायत बढ़ी
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छुट्टियों में बच्चों को व्यस्त रखने के उपाय
- रोज एक निश्चित समय पढ़ाई के लिए तय करें
- सुबह या शाम खेलकूद के लिए प्रेरित करें
- कहानी और सामान्य ज्ञान की किताबें पढ़ने दें
- मोबाइल और टीवी के समय की सीमा तय करें
- चित्रकला, संगीत और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ें
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