पखवारे भर बाद बीएसए की हुई तैनाती, चुनौतियों से जूझेंगे
बेसिक शिक्षा मंत्री के गृह जनपद में सूर्यकांत त्रिपाठी बनाए गए नए बीएसए
फर्जी शिक्षकों के गिरोह से निपटने, लिपिकों के कॉकस को तोड़ना चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार के गृह जनपद में आखिरकार एक पखवारा बाद नए बेसिक शिक्षा अधिकारी की तैनाती हो ही गई। नवागत बीएसए को कई चुनौतियों से जूझना होगा। मंत्री का जिला होने के कारण स्कूलों में बेहतर पठन-पाठन का माहौल बनाने, फर्जी शिक्षकों के गिरोह से निपटने के साथ ही कार्यालय में लिपिकों के कॉकस को तोड़ना अहम बिंदु शामिल हैं। बहरहाल, कार्यभार ग्रहण करने के बाद उनकी कार्यप्रणाली कैसी होगी, आने वाला समय ही बताएगा।
एक पखवारा पूर्व बेसिक शिक्षा अधिकारी राम सिंह को शासन ने विभिन्न आरोपों में निलंबित करते हुए निदेशालय संबद्ध कर दिया गया। इसके बाद से किसी की तैनाती नहीं हो सकी थी। सप्ताह भर तो विभाग बीएसएविहीन था। इसके बाद मुख्य विकास अधिकारी को अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया, पर समयाभाव के कारण बीएसए कार्यालय का माहौल पटरी पर नहीं आ सका। शुक्रवार को प्रदेश के 13 जनपदों में तैनाती की सूची जारी हुई तो जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान भदोही में वरिष्ठ प्रवक्ता के पद पर तैनात रहे सूर्यकांत त्रिपाठी को सिद्धार्थनगर में नए बीएसए के रूप में तैनाती दी गई है। तैनाती की सूूची जारी होने से पूर्व बातचीत में बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश चन्द्र द्विवेदी ने कहा था कि तैनाती के लिए बनाए गए मानक पर खरा उतरने वाले अफसरों की तलाश में 15 दिन लग गए। नवागत बीएसए को जिले में तमाम चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। मंत्री का गृह जिला होने के बाद स्कूलों में बेहतर पठन-पाठन का माहौल पैदा करने, विभागीय योजनाओं, कार्यक्रमों का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन कराने, शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने के साथ ही सबसे बड़ी चुनौती फर्जी शिक्षकों व उनसे जुड़े गिरोह से निपटने की होगी। इसके अलावा बीएसए कार्यालय में बाबुओं के कॉकस को तोड़ने जैसे अहम बिंदु शामिल हैं। फिलहाल, शासन स्तर से मानक पर खरा उतरने वाले अधिकारी के रूप में ही सूर्यकांत त्रिपाठी को बीएसए बनाया गया है। ऐसे में वह कितना खरा उतरते हैं, आने वाला समय ही बताएगा।