सिद्धार्थनगर। अगर तत्काल टिकट से यात्रा करनी है तो आपको काउंटर पर सबसे आगे खड़े होने पर भी टिकट मिल जाए, इसकी कोई गांरटी नहीं है। क्योंकि यहां तत्काल टिकट का अकाल है।
सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन पर लाइन लगाकर रात गुजरने के बाद भी टिकट नहीं मिल पा रहा है। टिकट काउंटर खुलते ही पता चल रहा है कि बुकिंग पूरी हो चुकी है। मंगलवार को तत्काल टिकट के बुकिंग का हाल जाने के लिए रेलवे स्टेशन पहुंचे तो यही हकीकत सामने आई है। जिसका कोई हल नहीं नजर आ रहा है। लोगों के मुताबिक सर्वर में खेल का नतीजा है कि बाहर बैठे लोग टिकट बुक कर लेते हैं और रेलवे स्टेशन की खिड़की से टिकट नहीं मिल पा रहा है।
सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन पर तत्काल टिकट के लिए नियमित 11 बजे काउंटर खुलता है। लेकिन नंबर आगे रहे इसके लिए लोग रात में ही लाइन में लग जाते हैं। फिर भी बिना बुकिंग शुरू हुए टिकट काउंटर खुलते ही जब नंबर आता है तो पता चलता है कि टिकट फुल हो चुकी है। वेटिंग चाहिए तो बोला। रेलवे स्टेशन पर सुबह 10:30 बजे यात्रियों की भीड़ लगी थी। लोग फार्म भर चुके थे और काउंटर खुलने का इंतजार था कि काउंटर खुले और टिकट लें। लेकिन काउंटर खुला तो पता चला कि टिकट बुक हो चुका है। चाहे वह मुंबई की टे्रन का हो या फिर दिल्ली की। उसका बाजार थाना क्षेत्र के सुगही गांव निवासी बुजुर्ग द्वारिका दुबे लाइन से बाहर निकले और फोन करते हुए किसी को बता रहे थे कि टिकट फुल है। वेटिंग में मिल रहा है क्या करें। उन्होंने फोन रख दिया। उनसे जब बात किए तो उन्होंने बताया कि गोरखपुर से दिल्ली जाने वाली किसी भी ट्रेन का तत्काल टिकट मिल जाए। इसके लिए आए थे। सुबह पांच बजे से खिड़की खुलने का इंतजार किया।
खिड़की 11:01 मिनट पर खुली। लेकिन गोरखधाम फुल हो चुका था। वेटिंग के लिए बोले। वेटिंग लेना ही नहीं है। वहीं, मुंबई की बांद्रा टे्रन से यात्रा करने वाले नौगढ़ शहर ने बताया कि उन्हें तत्काल में जाना था। लाइन लगाए थे। नौ नंबर वेटिंग मिला है। टिकट फुल हो चुका था। शहर के बुद्धनगर निवासी समीर हासमी ने बताया कि उन्हें मुंबई जाना था। टिकट के लिए रात से ही लाइन में लगे थे, लेकिन नहीं मिल सकता। जबकि सनई चौराहा निवासी तबरेज अहमद ने बताया कि टिकट में खेल हो रहा है। रात में ही आ गए थे। सबसे आगे थे, लेकिन खुल तो टिकट बुक हो चुका था। वेटिंग लेकर जाना पड़ रहा है।
-
टिकट वितरण में किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं होती है। प्रयास रहता है कि लाइन में लगे सभी लोगों को टिकट मिल जाए। एक साथ बुकिंग शुरू होती है। इसलिए तेजी से सीटें फुल हो जाती हैं।
-डीके उपाध्याय, स्टेशन अधीक्षक रेलवे स्टेशन सिद्धार्थनगर