दुकानदार लालचंद्र मोदनवाल ने बताया कि रक्षाबंधन पर्व पर रामकटोरी की मांग बढ़ जाती है। इस बार दोगुनी राम कटोरी की बिक्री होनी की आशा है। शास्त्री नगर निवासी प्रीति वर्मा ने बताया की हर साल रक्षा बंधन पर राखी बांधने के बाद राम कटोरी की मिठाई ही खिलाते हैं।
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बांसी का खजला का खूब का असर है कि कस्बे के सभी प्रमुख सड़कों व चौराहों पर खजले की दुकान लग गई है। खजले की शुरुआत वर्ष 1954 में माघ मेला से हुई है। उस समय खजले की दुकान बुलंदशहर, खुर्जा आदि शहरों से आती थी।
लोगों ने मिठाई को काफी पसंद किया जिसका परिणाम रहा कि मेले में खजले की काफी दुकान सजने लगी। धीरे धीरे खजले की मांग बढ़ता देख स्थानीय लोगों ने इसे बनाना सीख लिया और मेले के बाद भी कस्बे में खजले की दुकान लगाना शुरू कर दिया।