केले की खेती कर आर्थिक उन्नयन की राह पर किसान
- खुनियांव, डुमरियागंज आदि क्षेत्रों में किसान कर रहे केले की खेती
- पांच सौ हेक्टेयर में हो रहा केले का उत्पादन
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। पहले जिले में केले की खेती से किसान परहेज करते थे, लेकिन इससे हो रहे लाभ को देखते हुए कई किसान केले की खेती में रुचि ले रहे हैं। जिले के 250 से अधिक किसान पांच सौ हेक्टेयर में केले की खेती कर आर्थिक उन्नयन की राह पर हैं। उद्यान विभाग की तरफ से सरकारी अनुदान देकर किसानों को केले की खेती के लिए प्रोत्साहित भी किया जा रहा है।
वर्ष 2001 तक जिले में गिने-चुने किसान मात्र कुछ बीघे में ही केले की खेती करते थे, लेकिन वर्ष 2018 तक खुनियांव, डुमरियागंज समेत विभिन्न क्षेत्रों में 250 हेक्टेयर तक केले की दायरा बढ़ गया। वर्तमान में जिले के सभी ब्लॉकों में कुछ न कुछ दायरे में केले की खेती हो रही है। खुनियांव ब्लॉक के किसान सर्वाधिक रुचि ले रहे हैं, यहां पर किसानों के बीच केले के बेहतर उत्पादन करने के लिए होड़ लगी है। उसका ब्लॉक में महुलानी व चोरवर आदि गांव के आसपास भी किसान केले की खेती कर रहे हैं।
किसान मणिकांत तिवारी का कहना है कि पहले लाभ एवं खेती की विधि की जानकारी नहीं होने के कारण लोग केले की खेती से दूरी बनाए थे, अब जानकारी एवं सुविधाओं की उपलब्धता के कारण केले की खेती में किसान रुचि ले रहे हैं। प्रभारी उद्यान अधिकारी पीएन राम का कहना है कि किसानों को जागरूक करते हुए केले के खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही उन्हें सरकारी योजना का लाभ भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
-------------
केले की खेती में रख-रखाव महत्वपूर्ण
केले की खेती में सबसे महत्वपूर्ण पौधों का रख-रखाव जरूरी होता है। इसके अलावा समय से खाद एवं सिंचाई नहीं होने से भी उत्पादन पर प्रभाव पड़ता है। उद्यान अधिकारी पीएन राम का कहना है कि समय से खाद, सिंचाई एवं जरूरी दवाएं नहीं डालने से केले के उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ता है।
-------------
प्रति हेक्टेयर 30 हजार रुपये मिलता है सरकारी अनुदान
उद्यान विभाग की तरफ से किसान को केले की खेती करने के लिए पहले वर्ष बीज खरीदने, बुवाई और सिंचाई के लिए प्रति हेक्टेयर 30.738 हजार रुपये सरकारी अनुदान दिया जाता है। उद्यान अधिकारी पीएन राम का कहना है कि अगले वर्ष अनुदान की राशि घटकर प्रति हेक्टेयर 10,246 रुपये हो जाता है।